मिड-टर्म चुनाव के मद्देनजर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा और परमाणु केंद्रों पर इजरायली हमलों की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस फैसले ने ग्लोबल ऑयल मार्केट और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ओवल ऑफिस ने इजरायल के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें ईरान के परमाणु और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात कही गई थी। यह कदम 3 नवंबर, 2026 को होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है ताकि बाजार में किसी भी तरह की आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल से बचा जा सके। इजरायली सैन्य रणनीतिकारों ने इन हमलों के लिए लक्ष्यों की एक सूची तैयार कर ली थी, जिसे अक्टूबर की शुरुआत में अंजाम दिया जाना था।
निवेशकों के लिए, यह स्थिति मिडिल ईस्ट के एनर्जी सेक्टर से जुड़े गंभीर जियो-पॉलिटिकल जोखिमों को दर्शाती है। यदि ऊर्जा केंद्रों पर हमले होते हैं, तो यह सीधे तौर पर ग्लोबल ऑयल और गैस की कीमतों में अस्थिरता (Volatility) पैदा करता है। दुनिया पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रही है, ऐसे में ऊर्जा सप्लाई चेन में कोई भी छोटी सी बाधा ऑयल प्राइसेज को आसमान पर पहुंचा सकती है, जिसका असर शिपिंग कॉस्ट और अन्य ऊर्जा-निर्भर इंडस्ट्रीज पर पड़ेगा।
फिलहाल, अमेरिकी प्रशासन ने चुनाव के संवेदनशील दौर में बाजार को शांत रखने के लिए इस सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है। लेकिन इससे मार्केट में एक 'वेट एंड वॉच' वाली स्थिति बन गई है। मुख्य रिस्क यह है कि क्या चुनाव खत्म होते ही ये तनाव फिर से बढ़ेंगे? फिलहाल दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत चल रही है, लेकिन मिडिल ईस्ट का तनाव अभी भी जस का तस बना हुआ है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में सुरक्षा और एनर्जी पॉलिसी से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
