नेपाल में ग्लेशियर फटने और आई भयानक बाढ़ के कारण लगभग **400** लोगों की मौत हो चुकी है। इस आपदा के बाद अमेरिका ने **$5,00,000** की आपातकालीन सहायता का ऐलान किया है, ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके और लापता **90** अमेरिकी नागरिकों को ढूंढा जा सके।
भयानक आपदा का मंजर
नेपाल और तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर ढहने और उसके बाद हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। भोते कोशी नदी (Bhote Koshi River) के आसपास के इलाकों में बाढ़ के कारण सड़क, पुल और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने मरने वालों की संख्या 359 से 389 के बीच बताई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं।
अमेरिका की ओर से राहत
संकट की इस घड़ी में अमेरिकी सरकार ने $5,00,000 का फंड जारी किया है। यह राशि कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज (Catholic Relief Services) के जरिए पीड़ितों तक पहुंचाई जा रही है, जिससे उन्हें साफ पानी, अस्थायी आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने एक विशेष आपदा सलाहकार भी तैनात किया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौतियां
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता मलबा हटाने और उन 90 अमेरिकी नागरिकों को ढूंढने की है जो लापता हैं। भू-वैज्ञानिकों ने 'सेकेंडरी फ्लडिंग' की चेतावनी दी है, क्योंकि मलबे के कारण नदियां ब्लॉक हो गई हैं, जिससे अचानक पानी छोड़े जाने का खतरा बना हुआ है। भारी तबाही के चलते कनेक्टिविटी बहाल करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। निवेशकों और स्थानीय स्टेकहोल्डर्स की नजर अब इंफ्रास्ट्रक्चर की बहाली पर टिकी है, क्योंकि इससे भविष्य में आवाजाही और लॉजिस्टिक्स पर गहरा असर पड़ सकता है।
