ईस्टर्न पैसिफिक में अमेरिकी सेना के एक समुद्री ऑपरेशन में **5** लोगों की मौत हो गई है। सितंबर **2025** से अब तक इस 'नारको-टेररिस्ट' अभियान में मरने वालों का आंकड़ा **240** को पार कर चुका है, जिसके बाद पेंटागन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठ रहे हैं।
US साउदर्न कमांड ने मंगलवार को ईस्टर्न पैसिफिक में एक पोत पर स्ट्राइक की, जिसमें 5 लोगों की जान चली गई। सितंबर 2025 से शुरू हुए इस 'नारको-टेररिस्ट' कंटेनमेंट कैंपेन के तहत अब तक 70 से अधिक ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इस नवीनतम घटना के बाद कुल मौतों का आंकड़ा 240 के पार पहुंच गया है, जिससे नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के बीच बल के प्रयोग और इसकी सटीकता पर गंभीर बहस छिड़ गई है।
पेंटागन की ऑडिट और जांच
मई 2026 में पेंटागन के इंटरनल वॉचडॉग ने इस पूरे अभियान की टारगेटिंग प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू की है। हालांकि, यह ऑडिट केवल स्ट्राइक के क्रियान्वयन पर केंद्रित है, जबकि इस कैंपेन को 'सशस्त्र संघर्ष' (Armed Conflict) का दर्जा देने के कानूनी पहलू को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। यह वर्गीकरण बेहद अहम है क्योंकि यह सेना को मानक कानून प्रवर्तन (Law Enforcement) से कहीं अधिक व्यापक शक्तियां देता है।
रणनीति पर सवालिया निशान
रिसर्चर्स का मानना है कि इस समुद्री अभियान की प्रभावशीलता संदिग्ध है। डेटा के अनुसार, अमेरिका में आने वाली फेंटेनाइल की भारी खेप मुख्य रूप से मेक्सिको बॉर्डर के जमीनी रास्तों से आती है, न कि समुद्र के जरिए। संसाधनों का गलत जगह इस्तेमाल होने से रक्षा बजट की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। निवेशक और एनालिस्ट अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि पेंटागन की समीक्षा के बाद भविष्य में ऑपरेशनल बजट और इंटरडिक्शन रणनीति में क्या बड़े बदलाव हो सकते हैं।
