अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग की शुरुआत हो चुकी है। वर्जीनिया, इदाहो, मिनेसोटा और साउथ डकोटा में लोग मतदान कर रहे हैं। महंगाई और पॉलिसी में बदलाव के बीच, भारतीय निवेशकों को ग्लोबल ट्रेड, ब्याज दरों और FII फ्लो पर नजर रखनी चाहिए।
अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के लिए अर्ली वोटिंग शुरू हो चुकी है, जो 3 नवंबर को होने वाले अंतिम मतदान तक चलेगी। भले ही यह अमेरिका का आंतरिक राजनीतिक मुद्दा हो, लेकिन इसके नतीजे ग्लोबल मार्केट और भारतीय शेयर बाजार को सीधे प्रभावित करते हैं। इस चुनाव से तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस पार्टी का कब्जा होगा, जो अगले 2 सालों के लिए वहां की ट्रेड पॉलिसी और कानून तय करेगी।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
भारतीय बाजार के लिए मुख्य चिंता यह है कि चुनाव के बाद ग्लोबल कैपिटल फ्लो कैसे बदलेगा। इतिहास गवाह है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चुनावों के दौरान मार्केट में अस्थिरता (Volatility) बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर FII (Foreign Institutional Investors) के फैसलों पर पड़ता है। अगर चुनाव के नतीजों से टैक्स या ट्रेड पॉलिसी में बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं, तो भारतीय IT और फार्मा सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन सेक्टरों का बहुत बड़ा बिजनेस अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।
महंगाई और फेडरल रिजर्व का रुख
मौजूदा अमेरिकी चुनाव में महंगाई और ग्लोबल विवाद बड़े चुनावी मुद्दे हैं। इन कारकों का असर पहले से ही फेडरल रिजर्व (US Fed) की ब्याज दरों (Interest Rates) की पॉलिसी पर दिख रहा है। अमेरिकी बजट और सरकारी कर्ज को मैनेज करने का तरीका बदलने से ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर असर पड़ सकता है, जो भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश की दिशा बदल देता है।
आगे की राह
निवेशकों को 3 नवंबर के नतीजों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। एक स्पष्ट जनादेश बाजार में स्थिरता लाता है, जबकि बंटा हुआ जनादेश अनिश्चितता को बढ़ा सकता है। सबसे अहम यह होगा कि नई कांग्रेस मौजूदा ट्रेड संबंधों को बरकरार रखती है या प्रोटेक्शनिस्ट (संरक्षणवादी) नीतियां अपनाती है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन और भारतीय एक्सपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है।
