अमेरिका में **3 नवंबर** को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से ठीक एक हफ्ते पहले राष्ट्रपति Donald Trump की अप्रूवल रेटिंग सिर्फ **32%** पर बनी हुई है। डेमोक्रेटिक पार्टी पोलिंग में आगे है, और इस राजनीतिक बदलाव का सीधा असर भारतीय बाजार और FII निवेश पर पड़ सकता है।
चुनावी गणित और अनिश्चितता
चुनाव के नतीजों से पहले का माहौल ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सर्वे के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी को 47% समर्थन मिल रहा है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी 36% पर है। कांग्रेस (US Congress) में सत्ता का संतुलन बदलने से वहां की फिस्कल और ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है दांव?
इतिहास गवाह है कि अमेरिका में विधायी नियंत्रण बदलने का सीधा असर इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत पर पड़ता है। भारतीय निवेशकों की नजर इन तीन मुख्य बातों पर है:
- ट्रेड एग्रीमेंट: नए बदलावों से व्यापार समझौतों की शर्तें बदल सकती हैं।
- IT सेक्टर: वीजा नीतियों (Visa Policy) में किसी भी बदलाव का सीधा असर भारत की आईटी कंपनियों के मार्जिन पर होगा।
- FII फ्लो: सत्ता समीकरण बदलने से ग्लोबल लिक्विडिटी और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का रुख बदल सकता है।
इकोनॉमी का दबाव
अमेरिका में महंगाई और बढ़ती जीवन लागत (Cost of Living) बड़ा मुद्दा बन गई है। लगभग 73% मतदाता बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। यह दबाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, क्योंकि ब्याज दरों की चाल और डॉलर की मजबूती सीधे तौर पर भारतीय बाजारों, खासकर ऑयल और आईटी सेक्टर को प्रभावित करती है।
बाजार पर नजर
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, Nifty 50 और Sensex जैसे ग्लोबल इंडेक्स पर नजर रखना जरूरी है। सत्ता में किसी भी बदलाव से बाजार में शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है। निवेशकों को चुनाव के अंतिम नतीजों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स व सीनेट के परिणामों पर बारीक नजर बनाए रखनी चाहिए।
