US Midterm Elections: महंगाई और तनाव के बीच क्या बदलेगी अमेरिका की पॉलिसी? भारतीय निवेशकों पर होगा बड़ा असर

WORLD-AFFAIRS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
US Midterm Elections: महंगाई और तनाव के बीच क्या बदलेगी अमेरिका की पॉलिसी? भारतीय निवेशकों पर होगा बड़ा असर

अमेरिका के मिडटर्म चुनावों के शुरुआती रुझानों ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। महंगाई और तनाव से परेशान अमेरिकी वोटर्स अब नई आर्थिक नीतियों की मांग कर रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार, क्रूड ऑयल और FII इन्वेस्टमेंट पर पड़ सकता है।

अमेरिका में जारी मिडटर्म चुनाव इस समय राष्ट्रपति Donald Trump के दूसरे कार्यकाल के लिए एक बड़े जनमत संग्रह (Referendum) की तरह देखे जा रहे हैं। एग्जिट पोल्स साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि अमेरिकी जनता बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के बढ़ते खर्च से खासी परेशान है। इसके साथ ही ईरान के साथ चल रहे संघर्ष ने सरकार के सामने चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।

भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?

भारतीय निवेशकों के लिए यह चुनाव बेहद अहम हैं क्योंकि अमेरिका ग्लोबल इकोनॉमी का सबसे बड़ा हिस्सा है। यदि अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदलता है, तो वहां की राजकोषीय (Fiscal), व्यापार और विदेश नीति में बड़े बदलाव आ सकते हैं। अगर वहां 'स्प्लिट गवर्नमेंट' की स्थिति बनती है, तो बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

निवेशक खास तौर पर US Dollar और ब्याज दरों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर नई कांग्रेस महंगाई से निपटने के लिए आक्रामक कदम उठाती है, तो इसका असर Federal Reserve की ब्याज दर नीति पर पड़ेगा। ब्याज दरें बढ़ने या अस्थिर होने से डॉलर मजबूत होता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ता है और विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं।

ऑयल प्राइस और जियोपॉलिटिकल रिस्क

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा का क्षेत्र सबसे बड़ी चिंता है। ईरान के साथ तनाव के कारण फ्यूल की कीमतें बढ़ रही हैं। चूँकि भारत अपनी क्रूड ऑयल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार की अस्थिरता कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकती है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और करंट अकाउंट डेफिसिट पर बुरा असर पड़ेगा।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

आने वाले दिनों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की फाइनल तस्वीर साफ होने के बाद ही मार्केट की दिशा तय होगी। निवेशकों को खास तौर पर अमेरिका की ट्रेड टैरिफ पॉलिसी और एनर्जी सेक्टर से जुड़ी नीतियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सीधे ग्लोबल कमोडिटी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.