अमेरिका में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्लोरिडा में अपना वोट डाला है। निवेशकों की नजर अब इस चुनावी उठापटक पर है, क्योंकि राजनीतिक बयानों और पॉलिसी बदलावों का सीधा असर ग्लोबल मार्केट की वोलेटिलिटी (Volatility) पर पड़ता है।
पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने वेस्ट पाम बीच के इलेक्शन ऑफिस पहुंचकर अपना वोट डाला। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव का माहौल चरम पर है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स इसे काफी ध्यान से देख रहे हैं, क्योंकि आने वाले समय में यहाँ की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसका असर पूरी दुनिया के फाइनेंशियल मार्केट्स पर होगा।
राजनीतिक बयान और मार्केट पर असर
Trump ने अपने दौरे के दौरान कई कानूनी मामलों और चुनावी रणनीतियों पर बात की। उन्होंने अलास्का में चल रहे एक कानूनी विवाद और ओहायो के गवर्नर उम्मीदवार Vivek Ramaswamy के समर्थन पर भी अपनी राय रखी। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि इस तरह की आक्रामक बयानबाजी से ट्रेड पॉलिसी और रेगुलेटरी माहौल में अनिश्चितता बनी रहती है, जो मल्टीनेशनल कंपनियों के कामकाज को सीधे प्रभावित कर सकती है।
जियोपॉलिटिक्स का बाजार पर दबाव
ईरान और यूक्रेन जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर Trump की टिप्पणियां भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस तरह के बयान अक्सर एनर्जी प्राइसेज और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हलचल पैदा करते हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन और इन्फ्लेशन के मोर्चे पर पहले से ही दबाव है, ऐसे में किसी भी बड़ी राजनीतिक हलचल का असर करेंसी मार्केट और FII निवेश के रुख पर पड़ना तय है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि आने वाले हफ्तों में ये चुनावी और कानूनी घटनाक्रम अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को किस दिशा में ले जाते हैं।
