US-China Tension: जॉर्डन में हुए हमले में चीनी सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल, ग्लोबल मार्केट में बढ़ी हलचल

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AuthorMehul Desai|Published at:
US-China Tension: जॉर्डन में हुए हमले में चीनी सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल, ग्लोबल मार्केट में बढ़ी हलचल

वाशिंगटन ने चीन की कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि इन कंपनियों द्वारा दी गई सैटेलाइट तस्वीरों से 17 जुलाई, 2026 को जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस पर घातक मिसाइल हमला हुआ। इस घटना से वैश्विक टेक ट्रेड और सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि जॉर्डन के मुवाफाक साल्टी एयर बेस पर 17 जुलाई को हुए मिसाइल हमले में चीनी कंपनियों द्वारा मुहैया कराई गई हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और 4 अन्य घायल हुए थे।\n\nइस मामले में Earth Eye Co. और Chang Guang Satellite Technology जैसी चीन की कंपनियां जांच के दायरे में हैं, जिन पर पहले ही अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों ने ईरानी सैन्य ऑपरेशन्स के लिए सटीक टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराया। हालांकि, बीजिंग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।\n\nनिवेशकों के लिए यह स्थिति बड़े जियोपॉलिटिकल रिस्क के तौर पर देखी जा रही है। 24 सितंबर, 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित समिट से पहले इस खबर ने कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।\n\nग्लोबल टेक और डिफेंस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चिंता 'डुअल-यूज़' टेक्नोलॉजी (जैसे सैटेलाइट इमेजिंग और एयरोस्पेस इंटेलिजेंस) पर नए और सख्त प्रतिबंधों की है। 10 सितंबर को बेस पर एक और मिसाइल हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और भी अस्थिर बना दिया है, जिससे सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। मार्केट की नजरें अब आगामी कूटनीतिक बैठकों पर टिकी हैं, जहां टेक्नोलॉजी ट्रेड को लेकर लिए जाने वाले फैसले डिफेंस और टेक सेक्टर की दिशा तय करेंगे।

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