US कांग्रेसवुमन Pramila Jayapal ने भारत की वोटर लिस्ट से लगभग **13 करोड़** नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है। वहीं, Election Commission of India ने इसे रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
ECI का क्या है पक्ष?
Election Commission of India (ECI) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह सब 'स्पेशल समरी रिविज़न' प्रक्रिया का हिस्सा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहले दो चरणों में 7.2 करोड़ और तीसरे चरण में 6.16 करोड़ नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि इसका मकसद केवल डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य मतदाताओं के नामों को हटाकर लिस्ट को अपडेट करना है। जिन लोगों को लगता है कि उनके नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे Form 6 भरकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
मार्केट और निवेशकों के लिए क्या है मायने?
भले ही यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इसका भारतीय शेयर बाजार या कंपनियों के प्रदर्शन पर कोई सीधा असर नहीं है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म निवेशक अक्सर किसी देश की संस्थागत पारदर्शिता (Institutional Transparency) पर नजर रखते हैं, क्योंकि यह किसी भी देश के गवर्नेंस फ्रेमवर्क का हिस्सा होता है। फिलहाल, भारतीय बाजार पर इस मुद्दे का कोई मटेरियल इंपैक्ट देखने को नहीं मिला है।
