अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिका ने 'Pax Silica' पहल शुरू की है। इसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चीन पर ग्लोबल निर्भरता को कम करना है, जो सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर असर
अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक बड़े कूटनीतिक तनाव के बीच शुरू हुई है। यूक्रेन और वेस्ट एशिया के मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच स्पष्ट मतभेद दिख रहे हैं, जिसका असर फैसलों पर भी पड़ रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ा अपडेट अमेरिका की नई 'Pax Silica' रणनीति है।
क्या है 'Pax Silica' का मकसद?
यह पहल खास तौर पर उन दुर्लभ खनिजों और क्रिटिकल मिनरल्स (Rare Earth Elements) पर केंद्रित है, जिनके लिए दुनिया अब तक चीन पर निर्भर रही है। अमेरिका नए गठबंधन बनाकर इन सप्लाई चेन्स को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर करना चाहता है। यह उन सेक्टर्स के लिए बड़ी खबर है जो सीधे तौर पर टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अमेरिकी इकोनॉमी अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बूते मजबूत बनी हुई है, लेकिन ट्रेड पॉलिसी में अस्थिरता का खतरा बना हुआ है। इंडस्ट्रियल ओवरकैपेसिटी पर आम सहमति न बन पाने के कारण आने वाले समय में ट्रेड पॉलिसी और अधिक वोलेटाइल रह सकती है।
दिसंबर में होने वाले 'मियामी लीडर्स समिट' के पहले यह मीटिंग एक बड़े 'टेंपरेचर चेक' की तरह है। भारत समेत कई देश इस बड़े बदलाव के बीच अपने हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन्वेस्टर्स को सलाह है कि वे ग्लोबल ट्रेड एग्रीमेंट्स और सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों पर पैनी नजर रखें, क्योंकि यही भविष्य के मैन्युफैक्चरिंग हब तय करेंगे।
