US Department of Justice ने अपनी पिछली रिपोर्ट में सुधार करते हुए साफ कर दिया है कि NASA, US Senate और Federal Reserve जैसे संस्थानों को निशाना तो बनाया गया था, लेकिन हैकर्स उनके सिस्टम को भेदने में नाकाम रहे।
अमेरिकी सरकार के न्याय विभाग (US Department of Justice) ने हाल ही में जारी एक आधिकारिक स्पष्टीकरण में बड़ा सुधार किया है। विभाग ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका की महत्वपूर्ण संस्थाएं साइबर हमलों का शिकार हुई हैं। शुरुआती खबरों में NASA, US Senate और Federal Reserve को QTFY नामक हैकिंग ग्रुप द्वारा हैक किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन ताजा अपडेट के अनुसार ये सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सुरक्षा कवच ने काम किया
FBI और अन्य अधिकारियों के अनुसार, इन संस्थानों को निशाना जरूर बनाया गया था, लेकिन समय पर सॉफ्टवेयर पैचिंग और मजबूत सिक्योरिटी सिस्टम के चलते हैकर्स के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि 'टारगेट किया जाना' और 'डेटा चोरी होना' दो अलग बातें हैं।
कहाँ हुआ असर?
हालांकि बड़े सरकारी संस्थानों को राहत मिली है, लेकिन विभाग ने पुष्टि की है कि अन्य जगहों पर घुसपैठ हुई है। जांच में सामने आया है कि डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी (Department of Energy) की तीन लैब, नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ (National Institutes of Health) और कई निजी डिफेंस व फाइनेंस कंपनियों के सिस्टम में हैकर्स सेंध लगाने में सफल रहे। यह साइबर कैंपेन 2018 से सक्रिय माना जा रहा है।
मार्केट और निवेशकों के लिए संकेत
भले ही किसी विशेष स्टॉक पर इसका सीधा असर न हो, लेकिन यह घटना ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे साइबर वॉरफेयर अंतरराष्ट्रीय संबंधों का हिस्सा बनता जा रहा है, बैंकिंग, डिफेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर आने वाले समय में थ्रेट डिटेक्शन और डिफेंस सिस्टम में भारी निवेश जारी रखेंगे। निवेशकों के लिए अब साइबर सिक्योरिटी कंपनियों और IT सर्विस प्रोवाइडर्स की मजबूती पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
