US Treasury ने उन सभी वैश्विक संस्थाओं को कड़ी चेतावनी दी है जो ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं दे रही हैं। 23 सितंबर से इन कंपनियों को US डॉलर सिस्टम से बाहर करने का खतरा है, जिससे उन्हें ईरान के साथ कारोबार या अमेरिकी वित्तीय पहुंच में से किसी एक को चुनना होगा।
अमेरिकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एविएशन सेक्टर के लिए एक कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि 23 सितंबर 2026 से ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं प्रदान करने वाली किसी भी कंपनी को अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। यह कदम 'सेकेंडरी सैंक्शंस' (Secondary Sanctions) का उपयोग करके उठाया गया है, जो न केवल एयरलाइंस बल्कि थर्ड-पार्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स जैसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स, फ्यूल सप्लायर्स और टिकटिंग एजेंसियों को भी निशाना बनाएगा।
ग्लोबल कंपनियों पर संकट
यह निर्देश दुनिया भर की कंपनियों को एक कठिन चुनाव के लिए मजबूर करता है: या तो वे ईरानी एयरलाइंस के साथ काम जारी रखें या अमेरिकी डॉलर सिस्टम में अपनी पहुंच बनाए रखें। अंतरराष्ट्रीय फर्मों के लिए US वित्तीय नेटवर्क से बाहर होना किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा, क्योंकि इसके बिना क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड करना लगभग असंभव है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह कदम उन ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए रिस्क बढ़ा सकता है जो क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट हैंडल करते हैं। भारतीय बैंक, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए डॉलर अकाउंट्स बनाए रखते हैं, ऐसे अमेरिकी रेगुलेटरी बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। हालांकि अधिकांश भारतीय बैंक कड़े नियमों का पालन करते हैं, लेकिन इस तरह की सख्ती से अनुपालन (Compliance) लागत बढ़ सकती है।
कमोडिटी मार्केट पर असर
ईरान वैश्विक ऊर्जा बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भले ही ये प्रतिबंध केवल एविएशन तक सीमित हैं, लेकिन इससे पैदा होने वाला भू-राजनीतिक तनाव अक्सर कमोडिटी मार्केट, खासकर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अस्थिरता बढ़ा सकता है। निवेशकों को एनर्जी प्राइस और ग्लोबल सप्लाई चेन पर नजर रखनी चाहिए।
इसके अलावा, अमेरिका बीजिंग पर भी दबाव बढ़ा रहा है, क्योंकि चीन ईरान का प्रमुख आर्थिक भागीदार है। अगर अमेरिका वैकल्पिक पेमेंट चैनल्स को बंद करने में सफल रहता है, तो ईरानी एविएशन सेक्टर की वैश्विक कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
