अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। युद्ध के कारण अब तक **$37.5 बिलियन** का नुकसान हो चुका है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों और ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन पर साफ दिख रहा है।
डिफेंस सेक्टर पर दबाव
फरवरी 2026 से जारी इस संघर्ष ने अमेरिकी खजाने पर गहरा असर डाला है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, एडवांस्ड हथियारों की भारी कमी हो गई है और प्रोडक्शन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ा है। मौजूदा समय में डिफेंस कंपनियां ऑर्डर तो पा रही हैं, लेकिन $44 बिलियन से ज्यादा की ग्लोबल सेल्स के दबाव को झेलना मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
क्रूड ऑयल में आग
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता एनर्जी मार्केट है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है और भारतीय रुपये पर दबाव के साथ-साथ महंगाई दर (Inflation) भी बढ़ने का खतरा है।
डिप्लोमैटिक और अन्य नुकसान
केवल युद्ध का खर्च ही नहीं, बल्कि इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित राजनयिक सुविधाओं को भी लगभग $184 मिलियन का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही नागरिकों को सुरक्षित निकालने में आए खर्चों ने अमेरिकी राजकोष पर वित्तीय बोझ और बढ़ा दिया है। आने वाले समय में निवेशकों को डिफेंस सप्लाई चेन में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों के मोर्चे पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
