अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा के बाद वीजा नियमों का उल्लंघन करने पर ईरान के दो राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के संकेत हैं, जो ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए चिंता का विषय है।
अमेरिकी सरकार ने न्यूयॉर्क से ईरान के प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्यों को निष्कासित कर दिया है। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, इन राजनयिकों को 28 सितंबर, 2026 की समय सीमा के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था, जिसका उन्होंने पालन नहीं किया।
मार्को रुबियो का एक्शन और विवाद
अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की देखरेख में यह कार्रवाई पूरी हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पहला राजनयिक 2 अक्टूबर की रात और दूसरा 3 अक्टूबर की सुबह देश से रवाना हुआ। वहीं, ईरानी मिशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी यात्रा योजनाएं पहले से तय नियमों के अनुसार थीं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
निवेशकों की नजरें इस घटनाक्रम पर इसलिए टिकी हैं क्योंकि पश्चिम एशिया का तनाव ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत संवेदनशील है।
- कच्चा तेल और महंगाई: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। यदि खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो क्रूड ऑयल के दाम ऊपर जा सकते हैं, जिससे भारतीय रुपए पर दबाव पड़ेगा।
- सप्लाई चेन का रिस्क: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के पास किसी भी तरह की अस्थिरता से फ्रेट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकते हैं।
- सेक्टोरल असर: इसका सीधा असर लॉजिस्टिक्स, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों पर पड़ता है, जो ऊर्जा की लागत पर निर्भर हैं।
फिलहाल, मार्केट यह देख रहा है कि क्या यह महज एक प्रशासनिक कार्रवाई है या यह तनाव आगे चलकर किसी बड़े भू-राजनीतिक टकराव का रूप लेगा। निवेशकों के लिए क्रूड ऑयल फ्यूचर्स और करेंसी मूवमेंट पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
