US स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff यूक्रेन के बाद अब रूस का दौरा करने वाले हैं। इस डिप्लोमैटिक मिशन का मकसद रीजनल तनाव को कम करना है, जिसका सीधा असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट और भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ सकता है।
US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio ने पुष्टि की है कि स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff ने हाल ही में कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy के साथ एक अहम बैठक की है। इस चर्चा को 'प्रोडक्टिव' बताया गया है और अब Witkoff सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) जाकर वहां की सरकार के सामने प्रस्ताव पेश करेंगे।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करते हैं, यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। एनर्जी मार्केट पूरी तरह से जियो-पॉलिटिकल हालातों पर टिका होता है। अगर यह तनाव कम होता है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा राहत का संकेत होगा।
कमोडिटी और सप्लाई चेन पर असर
सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों पर भी इस युद्ध का बुरा असर पड़ा है। ग्लोबल ट्रेडर्स इस डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। यदि रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी कम होती है, तो कमोडिटी प्राइसेज में जारी वोलैटिलिटी (Volatility) कम हो सकती है, जिससे उन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी जो कच्चे माल के लिए वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
फिलहाल, मार्केट की नजरें सेंट पीटर्सबर्ग में होने वाली बातचीत के नतीजों पर टिकी हैं। अगर यह कूटनीतिक कोशिश सफल होती है, तो आने वाले महीनों में एनर्जी सेक्टर की कॉस्ट स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जो सीधे तौर पर देश की महंगाई और ट्रेड बैलेंस को प्रभावित करेगा।
