ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आग बबूला हो गई हैं। अमेरिकी सेना ने पांच Iranian तेल टैंकरों को तबाह कर दिया है, जिससे ब्रेंट क्रूड **$98** प्रति बैरल के पास पहुंच गया है।
तनाव क्यों बढ़ा?
8 सितंबर को US सेंट्रल कमांड ने ओमान की खाड़ी में पांच Iranian क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद की गई है। हालांकि, इसमें किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक (Geopolitical) अनिश्चितता पैदा कर दी है।
क्रूड पर क्या असर?
ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर $97-$98 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले 7 हफ्तों का उच्चतम स्तर है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, यह एक बड़ी मुसीबत है। तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे ट्रेड बैलेंस बिगड़ सकता है और घरेलू महंगाई (Inflation) और भी भड़क सकती है।
भारतीय बाजार पर असर
शेयर बाजार में इस अनिश्चितता का असर साफ दिख रहा है। Nifty 50 और BSE Sensex में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
- किस सेक्टर को नुकसान? एयरलाइंस, पेंट्स, केमिकल्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियां, जो ईंधन पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
- किसे फायदा? ONGC और Oil India जैसे सरकारी तेल उत्पादकों के शेयर प्राइस ग्लोबल बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं, इसलिए वहां तेजी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों को अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाली गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि शिपिंग रूट में कोई भी व्यवधान ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए भारी साबित हो सकता है।
