अमेरिकी सरकार ने एक अफगान शरणार्थी को मध्य अफ्रीकी गणराज्य डिपोर्ट कर दिया है। यह कदम कोर्ट के उस आदेश का सीधा उल्लंघन है जिसमें उसे तालिबान से खतरों के चलते वापस भेजने पर रोक लगाई गई थी।
अमेरिकी सरकार की नई इमिग्रेशन रणनीति के तहत शनिवार, 29 अगस्त 2026 को एक डिपोर्टेशन फ्लाइट मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लिए रवाना हुई। इस उड़ान में कम से कम 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों के अलावा नेपाल और निकारागुआ के लोग भी शामिल थे। इनमें से एक अफगान युवक ऐसा था जिसे अमेरिकी कोर्ट ने 'विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल' का संरक्षण दिया था, क्योंकि उसे वापस अफगानिस्तान भेजने पर तालिबान से जान का खतरा था।
कानूनी दांव-पेच और विवाद
युवक के परिवार के अमेरिकी सेना के साथ संबंध रहे थे, जिसके कारण उसने पहले ही अपने भाई को खो दिया था। बावजूद इसके, सरकार ने अपनी 'थर्ड-कंट्री रिमूवल' नीति का हवाला देते हुए उसे ऐसे देश भेज दिया जहां उसका कोई आधार नहीं है। यह इलाका अमेरिकी विदेश विभाग की 'लेवल 4: डू नॉट ट्रैवल' (Level 4: Do Not Travel) सूची में आता है, जहां हिंसा और अस्थिरता चरम पर है।
मानवाधिकारों पर खतरा
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर रही है। जून और जुलाई 2026 में भी ऐसी उड़ानें भरी गई थीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार अपनी इस विवादास्पद नीति पर आगे बढ़ेगी या बढ़ते न्यायिक दबाव और संवैधानिक चुनौतियों के चलते उसे बैकफुट पर आना पड़ेगा।
