US Defense Secretary Pete Hegseth ने मिडटर्म इलेक्शन की सुरक्षा के लिए NSA और Cyber Command को तैनात कर दिया है। इस बड़े बदलाव ने ग्लोबल मार्केट की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि अमेरिकी राजनीति में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ता है।
सैन्य दखल का बड़ा फैसला
US Defense Secretary Pete Hegseth ने 22 सितंबर को एक आधिकारिक निर्देश जारी कर नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) और US Cyber Command को आगामी 3 नवंबर के मिडटर्म इलेक्शन के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करने का आदेश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी हस्तक्षेप को रोकना है। गौर करने वाली बात यह है कि इलेक्शन की सुरक्षा अब नागरिक संस्थाओं के बजाय सीधे मिलिट्री इंटेलिजेंस के पास चली गई है।
क्यों परेशान हैं निवेशक?
यह कदम Department of Homeland Security में हालिया प्रशासनिक बदलावों के बाद उठाया गया है। पहले, साइबर सुरक्षा का जिम्मा 'Cybersecurity and Infrastructure Security Agency' के पास था, जिसके पुनर्गठन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए संकेत
इतिहास गवाह है कि अमेरिकी चुनाव के दौरान पैदा हुई अनिश्चितता का असर ग्लोबल सेंटीमेंट पर गहरा होता है। चूँकि अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी पॉलिसी ग्लोबल कैपिटल फ्लो को नियंत्रित करते हैं, इसलिए किसी भी तरह का राजनीतिक तनाव या सुरक्षा संबंधी घबराहट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रिस्क एपेटाइट को प्रभावित करती है। अगर चुनाव के बाद राजनीतिक तनाव लंबा खिंचता है, तो निवेशक 'Safe Assets' की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय बाजारों में लिक्विडिटी और करेंसी स्टेबिलिटी पर दबाव देखने को मिल सकता है।
