अमेरिकी अदालत का चौंकाने वाला फैसला
अमेरिका की कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प का 10% का ग्लोबल टैरिफ कानून के तहत "अवैध" और "अनधिकृत" था। अदालत ने माना कि प्रशासन यह साबित नहीं कर पाया कि ये टैरिफ लगाने के लिए 'अंतर्राष्ट्रीय भुगतान की गंभीर समस्याएं' या 'बड़े भुगतान-घाटे' जैसी शर्तें पूरी होती हैं, जैसा कि 1974 के ट्रेड एक्ट में ज़रूरी है। यह फैसला एग्जीक्यूटिव ब्रांच की ट्रेड टैरिफ लगाने की शक्ति को काफी सीमित करता है।
Congress का पलड़ा भारी
इस फैसले ने शक्तियों के पृथक्करण (separation of powers) के सिद्धांत को मजबूत किया है और ट्रेड पॉलिसी पर Congress की भूमिका को फिर से स्थापित किया है। 1974 का सेक्शन 122 वास्तव में भुगतान संतुलन की समस्याओं के लिए एक सीमित, अल्पकालिक उपाय था, न कि व्यापक टैरिफ लगाने का ज़रिया। अदालत ने साफ किया कि प्रशासन का ध्यान व्यापार घाटे पर था, न कि भुगतान समस्याओं पर, जो कानून की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की कुछ शक्तियों पर रोक लगाई थी, जिससे यह साफ होता है कि अदालतें एग्जीक्यूटिव एक्शन्स की बारीकी से जांच कर रही हैं।
भारत समेत कई देशों की डील पर अनिश्चितता
इस फैसले का सीधा असर चल रही व्यापारिक वार्ताओं और मौजूदा समझौतों पर पड़ेगा। फरवरी 2026 में तय हुआ अमेरिका-भारत के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते (interim trade deal) को अब इस कानूनी अनिश्चितता के कारण फिर से बातचीत की मेज पर लाना होगा। वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर व्यवसायों के लिए यह नीतिगत अस्थिरता (policy volatility) बढ़ी है, जो आम तौर पर निवेश को हतोत्साहित करती है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी कहा है कि ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितता, टैरिफ के बजाय, आयात और निवेश को कम कर सकती है। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ अपील करने की उम्मीद है, जिससे यह कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है।
आगे भी बनी रहेगी अनिश्चितता?
कोर्ट के फैसले के बावजूद, अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी में अनिश्चितता बनी हुई है। प्रशासन द्वारा 122 जैसे सीमित आपातकालीन कानूनों का उपयोग यह दिखाता है कि एग्जीक्यूटिव ब्रांच व्यापक टैरिफ लागू करने के तरीके खोजती रहेगी। इससे आगे भी कानूनी चुनौतियाँ और व्यापार कानूनों पर विवाद बढ़ सकते हैं। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव का 60 देशों में जबरन श्रम (forced labor) की जांच, जिसमें नए टैरिफ या आयात प्रतिबंध लग सकते हैं, मामले को और जटिल बनाती है। इतिहास गवाह है कि राष्ट्रपति अक्सर एक रास्ता बंद होने पर दूसरी कार्यकारी शक्तियों का सहारा लेते हैं। यह संकेत देता है कि भले ही टैरिफ के कानूनी आधार को चुनौती दी जाए, लेकिन एक नीतिगत औजार के रूप में उनका उपयोग जारी रह सकता है।
