US Navy ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि ईरान के मिसाइल हमलों से बहरीन स्थित 'Naval Support Activity' को भारी नुकसान पहुंचा है, जो US Fifth Fleet का मुख्यालय है। इस हमले के बाद पर्शियन गल्फ में सुरक्षा और एनर्जी सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
अमेरिकी नौसेना ने अब खुलकर मान लिया है कि उनके सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक, बहरीन स्थित 'Naval Support Activity', ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। एक्टिंग नेवी सेक्रेटरी Hung Cao के मुताबिक, यह नुकसान इतना गहरा है कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक ऑपरेशन्स के पूरे मैनेजमेंट को बदलना पड़ रहा है।\n\n### ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक असर\n\nसेना के अधिकारियों का कहना है कि यह बेस फिलहाल किसी भी तरह के स्टैंडर्ड फ्लीट ऑपरेशन्स को संभालने की स्थिति में नहीं है। बेस की इमारतों, बैरकों और कम्युनिकेशन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। इसका सीधा असर अमेरिकी युद्धपोतों पर पड़ रहा है। हाल ही में, USS Abraham Lincoln को अपनी तैनाती के बाद डॉक करने के लिए जगह खोजने में भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बेस को दोबारा खड़ा करने में करीब $400 मिलियन का खर्च आ सकता है।\n\n### भारतीय निवेशकों के लिए चिंता क्यों?\n\nभारतीय बाजार और निवेशकों के लिए यह खबर काफी संवेदनशील है क्योंकि बहरीन बेस 'Strait of Hormuz' के पास स्थित है, जो कच्चे तेल और LNG की सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रूट है। \n\nअगर वहां की सुरक्षा स्थिति बिगड़ती है और समुद्री जहाजों की आवाजाही में बाधा आती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आ सकता है। ग्लोबल मार्केट में पहले ही डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। ऐसे में ईरान और पश्चिमी ताकतों के बीच बढ़ता तनाव एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से एक बड़ा रिस्क फैक्टर बना हुआ है, जिस पर हर निवेशक को पैनी नजर रखनी चाहिए।
