अमेरिका ने सऊदी अरब को **$24.3 बिलियन** में **48** F-35 फाइटर जेट्स बेचने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, सऊदी अरब में **110 मिलियन** टन यूरेनियम और रेयर-अर्थ अयस्क मिलने की खबर से ग्लोबल मार्केट में हलचल है।
डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने $24.3 बिलियन के सौदे को हरी झंडी दी है। इस डील के तहत 48 F-35 फाइटर जेट और 49 इंजन सऊदी अरब को दिए जाएंगे। इस डील में Lockheed Martin मुख्य मैन्युफैक्चरर है, जबकि Pratt & Whitney इंजन की सप्लाई करेगी। फिलहाल यह मामला अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा (Congressional Review) के अधीन है। मिडिल ईस्ट में F-35 की पहुंच अब तक सीमित रही है, ऐसे में यह डिफेंस पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
माइनिंग की हकीकत
सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र में 110 मिलियन टन यूरेनियम और रेयर-अर्थ अयस्क मिलने का दावा किया गया है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह कुल कच्चा अयस्क (Raw Ore) है, न कि रिफाइंड मेटल। किसी भी माइनिंग प्रोजेक्ट की सफलता उसके ग्रेड और प्रोसेसिंग की लागत पर निर्भर करती है। यह अभी खोज के शुरुआती चरण में है और इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में लंबा वक्त लग सकता है।
जियोपॉलिटिकल शिफ्ट
सऊदी अरब ने चीन समर्थित डिजिटल करेंसी पेमेंट प्रोजेक्ट 'mBridge' से बाहर निकलने का फैसला किया है। मई 2025 के टेक्निकल टेस्ट के बाद यह कदम बताता है कि देश अब नॉन-डॉलर पेमेंट सिस्टम से दूरी बना रहा है।
निवेशकों के लिए नजरिया
यह खबर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, कमोडिटी सप्लाई और जियोपॉलिटिकल रिस्क के लिहाज से अहम है। डिफेंस डील अभी फाइनल नहीं हुई है और इस पर कांग्रेस की कड़ी निगरानी रहेगी। वहीं, माइनिंग के मोर्चे पर भी यह एक कैपिटल-इंटेंसिव प्रक्रिया होगी। निवेशकों को आधिकारिक सरकारी अपडेट और पॉलिसी में हो रहे बदलावों पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।
