US प्रेसिडेंट Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच **3** दिवसीय समिट शुरू हो गई है। इसमें ट्रेड टैरिफ, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और मिलिट्री पॉलिसी पर चर्चा हो रही है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए काफी अहम है।
हाई-स्टेक समिट और ग्लोबल इकॉनमी
US प्रेसिडेंट Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की यह 3 दिवसीय मुलाकात ग्लोबल इकॉनमी की दिशा तय कर सकती है। जॉइंट बेस एंड्रयूज में शुरू हुई इस बैठक का मुख्य एजेंडा ट्रेड टैरिफ, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में वर्चस्व की जंग है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रही तनातनी, जिसमें यूक्रेन और मिडिल ईस्ट जैसे जियोपॉलिटिकल मुद्दे भी शामिल हैं, ने मार्केट में चिंता बढ़ा दी है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों नेता टैरिफ विवादों को सुलझा पाएंगे, क्योंकि यह ग्लोबल इंडेक्स और सप्लाई चेन में भारी वोलैटिलिटी (Volatility) पैदा करता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारत के लिए यह एक बड़ा मौका हो सकता है। 'China+1' स्ट्रेटेजी के तहत मल्टीनेशनल कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर शिफ्ट करने की कोशिश कर रही हैं। अगर इस समिट के बाद ट्रेड बैरियर्स में बदलाव आता है, तो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेशलिटी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है।
टेक सेक्टर पर नज़र
AI और चिप टेक्नोलॉजी पर सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल भारतीय टेक कंपनियों की कॉस्ट को प्रभावित कर सकते हैं। अगर इस समिट में हाई-टेक कंपोनेंट्स पर कोई नया समझौता होता है, तो रॉ मटेरियल की सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर दिखेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स अब ताइवान से जुड़ी अमेरिकी आर्म्स पॉलिसी और इंपोर्ट ड्यूटी पर आधिकारिक बयानों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
