वर्ल्ड बैंक की क्लाइमेट पॉलिसी पर अमेरिकी टकराव
IMF और World Bank की वसंत बैठकों (Spring Meetings) के दौरान World Bank की क्लाइमेट पॉलिसी को लेकर बड़ा टकराव सामने आया है। अमेरिका ने World Bank के क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान (CCAP) को लेकर आपत्ति जताई है, जिसके तहत बैंक अपने कुल कर्ज का 45% हिस्सा क्लाइमेट प्रोजेक्ट्स में लगाता है। यह प्लान जून 2026 तक के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन अब अमेरिकी दबाव के कारण इसमें बदलाव की आशंका है।
अमेरिका क्यों कर रहा है विरोध?
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेस्सेंट (Scott Bessent) ने बैंक के क्लाइमेट फाइनेंस टारगेट्स को "दूरदर्शिता की कमी" वाला और "बेतुका" बताया है। अमेरिका चाहता है कि World Bank कर्ज को क्लाइमेट लक्ष्यों से हटाकर अहम क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) और किफायती ऊर्जा (affordable energy), जिसमें फॉसिल फ्यूल्स (fossil fuels) भी शामिल हैं, के समर्थन पर केंद्रित करे। बैंक के सबसे बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर अमेरिका का यह रुख काफी मायने रखता है।
IMF की चेतावनी और कर्ज का बढ़ता बोझ
इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताजनक चेतावनी जारी की है। IMF का अनुमान है कि 2026 तक ग्लोबल ग्रोथ सिर्फ 3.1% रह सकती है, जबकि महंगाई 4.4% पर बनी रहेगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए IMF ने सप्लाई चेन में बाधा और घटते भरोसे पर चिंता जताई है, जिसका असर खासकर विकासशील देशों पर पड़ सकता है।
इन चिंताओं के बीच, विकासशील देशों ने कर्ज के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। UNCTAD समर्थित "बोरोअर्स प्लेटफॉर्म" (Borrowers' Platform) लॉन्च किया गया है, ताकि वे कर्ज की रणनीतियों को बेहतर ढंग से समन्वित कर सकें। यह इस बात का संकेत है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) ने 2022-2023 के बीच नए लोन से $38.5 बिलियन ज्यादा बाहरी लेनदारों को चुकाया है। 2024 तक LMICs का बाहरी कर्ज रिकॉर्ड $11.7 ट्रिलियन पहुंच गया है, और 54 देश कर्ज भुगतान पर स्वास्थ्य या शिक्षा से ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
वर्ल्ड बैंक की नई पहलें: ग्रोथ और जॉब्स पर फोकस
क्लाइमेट को लेकर बहस के बीच, World Bank ने ग्रोथ और नौकरी पैदा करने की दिशा में अपनी नई पहलों पर भी ज़ोर दिया है। "पाथवेज़ टू जॉब्स" (Pathways to Jobs) के जरिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है। "वॉटर फॉरवर्ड" (Water Forward) पहल 2030 तक 1 अरब लोगों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिसमें 14 देशों ने राष्ट्रीय जल समझौते (water compacts) की घोषणा की है। इसके अलावा, "एग्री-जॉब्स" (Agri-Jobs) के तहत बैंक $9 अरब का निवेश करके 300 मिलियन किसानों को वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने में मदद करेगा। अफ्रीकी देशों में ऊर्जा पहुंचाने के लिए "मिशन 300" (Mission 300) का लक्ष्य 2030 तक 300 मिलियन लोगों को बिजली मुहैया कराना है।
आगे का रास्ता: ग्रोथ और क्लाइमेट के बीच संतुलन
अमेरिका का क्रिटिकल मिनरल्स पर ज़ोर और फॉसिल फ्यूल्स को समर्थन देना, दिखाता है कि विकासशील देशों के लिए रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा और आर्थिक विकास पर ध्यान बढ़ रहा है। हालांकि, ग्रोथ पर इस बढ़ते फोकस से क्लाइमेट चेंज के खतरे और बढ़ सकते हैं, खासकर कमजोर देशों के लिए। MDBs का कर्ज़ पर निर्भरता और प्राइवेट सेक्टर-आधारित समाधान, अनुकूलन की ज़रूरतों को पूरी तरह संबोधित नहीं कर पाते। कर्ज का बढ़ता संकट और जलवायु झटकों से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों की स्थिति, World Bank के लिए एक मुश्किल संतुलन बनाने का संकेत देती है।
