बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुसुर रहमान ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। पद संभालते ही उन्होंने UN सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल ढांचागत सुधारों की मांग की है, ताकि इसे आधुनिक वैश्विक चुनौतियों के अनुकूल बनाया जा सके।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुसुर रहमान ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष के रूप में अपनी पारी शुरू कर दी है। उनका मुख्य एजेंडा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का आधुनिकीकरण है। रहमान का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यानी 1945 में बना यह ढांचा अब वर्तमान दौर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के लिए अपर्याप्त हो चुका है।
भरोसे का संकट और चुनौतियां
रहमान ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र के भीतर एक गहरा 'ट्रस्ट डेफिसिट' (भरोसे का संकट) पैदा हो गया है। इसे खत्म करने के लिए उन्होंने UN80 पहल का समर्थन किया है, जिसका नेतृत्व महासचिव एंटोनियो गुटेरेस कर रहे हैं। रहमान ने चेताया है कि केवल दिखावटी सुधार काम नहीं आएंगे; अब संस्था को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए ठोस और बड़े बदलाव करने होंगे।
क्या सुधार आसान है?
राजनयिक जानकारों के अनुसार, यह राह इतनी आसान नहीं है। सुरक्षा परिषद में सुधारों के रास्ते में 'इंस्टीट्यूशनल इनर्शिया' (संस्थागत जड़ता) सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के पास मौजूद 'वीटो पावर' भी किसी भी बड़े बदलाव के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 193 सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाना रहमान के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। हालांकि, उनकी थीम 'रिस्टोरिंग ट्रस्ट, मैनेजिंग ट्रांसफॉर्मेशन' यह संकेत देती है कि वे कूटनीतिक बाधाओं को पार कर एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
