UN Women की एक नई रिपोर्ट ने वेस्ट बैंक के हालातों पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं, उनमें से **40%** को अपना घर छोड़ना पड़ा है, जो पुरुषों के मुकाबले काफी अधिक है।
विस्थापन का बड़ा आंकड़ा
UN Women द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वेस्ट बैंक में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। सर्वे में शामिल किए गए 800 परिवारों के डाटा से पता चलता है कि महिला-प्रधान घरों में विस्थापन की दर 40% है, जबकि पुरुषों के नेतृत्व वाले परिवारों में यह दर 30% दर्ज की गई है। जुलाई 2026 तक, कुल 41,500 लोगों में से 20,000 से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुई हैं।
आवाजाही पर ऐतिहासिक पाबंदियां
वेस्ट बैंक में आवाजाही पर पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा प्रतिबंध लगे हैं। वर्तमान में 925 भौतिक बाधाएं जैसे चेकपॉइंट्स और बैरियर्स मौजूद हैं। सर्वे में शामिल लगभग 90% महिलाओं का कहना है कि चेकपॉइंट्स पर वे खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, जबकि 57% महिलाओं को डर है कि कहीं उन्हें गिरफ्तार न कर लिया जाए।
आर्थिक और मानसिक दबाव
इन प्रतिबंधों का सीधा असर कमाई और खान-पान पर पड़ा है। महिला-प्रधान 83,200 परिवारों में से अधिकांश अब कर्ज पर निर्भर हैं और खाने की कमी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, सुरक्षा का डर और हिंसा की बढ़ती आशंका ने इन परिवारों पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर डाला है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि अगर स्थिति नहीं बदली, तो ये परिवार लंबी गरीबी और विस्थापन के चक्र में फंस सकते हैं।
