संयुक्त राष्ट्र (UN) की जांच में रूस द्वारा यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर किए गए हमलों को युद्ध अपराध माना गया है। रिपोर्ट में एक ऐसे नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है, जो भारतीयों समेत कई विदेशी नागरिकों को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर रहा है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार पर असर
संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच आयोग ने स्पष्ट किया है कि सर्दियों के दौरान यूक्रेन के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाना मानवीय आधार पर अपराध है। इससे न केवल लाखों लोग कड़ाके की ठंड में बिजली-पानी से वंचित हुए, बल्कि वैश्विक एनर्जी मार्केट में भी अस्थिरता बढ़ गई है। भारत, जो कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक देश है, इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते महंगाई और ट्रेड बैलेंस के दबाव का सामना कर सकता है।
भारतीयों की जबरन भर्ती का जाल
आयोग ने एक गंभीर मानव तस्करी नेटवर्क का पता लगाया है, जो वैध बिजनेस का मुखौटा पहनकर काम कर रहा है। यह रैकेट भारत, बांग्लादेश और नेपाल जैसे 29 देशों के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाता है और फिर रूसी भाषा में सैन्य अनुबंध (Military Contracts) पर हस्ताक्षर करवाकर युद्ध में झोंक देता है।
निवेशकों के लिए संकेत
इस रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर कूटनीतिक दबाव बढ़ना तय है। निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता पैदा कर सकती है, क्योंकि नए प्रतिबंधों या जवाबी कार्रवाई से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारें अपनी नियामक निगरानी (Regulatory Scrutiny) को कितना सख्त करती हैं और विदेशी रोजगार के नाम पर हो रही इस धोखाधड़ी को कैसे रोकती हैं।
