संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट ने म्यांमार में बढ़ती हिंसा और आर्थिक अस्थिरता को लेकर अलर्ट जारी किया है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले अहम ट्रेड रूट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर अब बड़ा रिस्क बना हुआ है।
म्यांमार की बिगड़ती स्थिति का भारत पर असर
संयुक्त राष्ट्र की राइट्स इन्वेस्टिगेटर केली करी ने म्यांमार की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य सरकार अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए नागरिकों पर हमले कर रही है और चीन तथा रूस जैसे देशों से हथियारों की सप्लाई ले रही है। इस जियोपॉलिटिकल अस्थिरता का सीधा असर भारत के रणनीतिक हितों पर पड़ रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खतरा
म्यांमार की डगमगाती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ता भ्रष्टाचार भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ी चिंता है। भारत के लिए सबसे अहम 'कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट' (Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project) है, जो पूर्वोत्तर भारत को सित्तवे बंदरगाह के जरिए दुनिया से जोड़ने का काम करता है। मौजूदा हालातों के कारण इस प्रोजेक्ट में देरी, लागत में बढ़ोतरी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
कूटनीतिक चुनौतियां और आगे क्या?
चीन और रूस की मौजूदगी ने क्षेत्रीय कूटनीति को और जटिल बना दिया है। म्यांमार के जुंटा (Junta) का इन बाहरी ताकतों पर निर्भर होना भारत के लिए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की राह में बड़ी रुकावट है। इसके अलावा, शरणार्थियों की समस्या और सप्लाई चेन में बाधा जैसे रिस्क लगातार बने हुए हैं।
निवेशकों की नजरें अब इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले पर टिकी हैं, जो अक्टूबर में आ सकता है। जानकारों का मानना है कि इस कानूनी फैसले के बाद वहां विरोध प्रदर्शन और अशांति बढ़ सकती है, जिसका असर रीजनल ट्रेड और सिक्योरिटी कॉरिडोर पर पड़ना तय है।
