UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस **12-13 सितंबर, 2026** को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट में हिस्सा लेंगे। समिट का मुख्य फोकस आर्थिक मजबूती और इनोवेशन पर है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला यह समिट बेहद अहम माना जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य थीम 'रेसिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी' है। ब्लॉक की 20वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहे इस इवेंट में ट्रेड इंटीग्रेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसका सीधा असर ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।
मार्केट के लिए क्यों है अहम?
निवेशकों की नजर इस बात पर है कि समिट में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म और New Development Bank के जरिए फंड जुटाने को लेकर क्या फैसला लिया जाता है। ब्रिक्स सदस्य देश ग्लोबल GDP का एक बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन पर किसी भी सहमति का असर कमोडिटी की कीमतों और मैन्युफैक्चरिंग लागत पर पड़ सकता है।
एनर्जी सिक्योरिटी और रिस्क फैक्टर्स
समिट में एनर्जी सिक्योरिटी पर चर्चा होना तय है, विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण रास्तों को लेकर। भारत जैसे देशों के लिए, जो बड़े पैमाने पर एनर्जी का आयात करते हैं, स्थिर व्यापार कॉरिडोर बहुत मायने रखते हैं। इसके अलावा, मार्केट एनालिस्ट्स इस बात पर भी नजर रखेंगे कि IMF और World Bank जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार को लेकर ब्रिक्स देश क्या रुख अपनाते हैं। समिट के बाद जारी होने वाला जॉइंट डिक्लेरेशन भविष्य की आर्थिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
