UK सरकार ने देश की सभी यूनिवर्सिटीज को China General Technology Research Institute के साथ अपने सभी रिसर्च पार्टनरशिप खत्म करने का निर्देश दिया है। MI5 की चेतावनी के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
जासूसी का बड़ा खुलासा
UK के सिक्योरिटी मिनिस्टर Dan Jarvis ने इस सरकारी निर्देश की पुष्टि की है। इंटेलिजेंस एजेंसियों की जांच में पता चला है कि यह रिसर्च इंस्टीट्यूट विदेशी जासूसी का एक जरिया बना हुआ था। इस कदम का मुख्य मकसद संवेदनशील रिसर्च और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को विदेशी ताकतों के हाथ में जाने से रोकना है, खासकर उन क्षेत्रों में जो नेशनल सेफ्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
MI5 की जांच में क्या निकला?
UK की इंटरनल इंटेलिजेंस एजेंसी, MI5 ने अपनी जांच में पाया कि यह इंस्टीट्यूट चीनी सरकारी ऑपरेशंस के लिए एक फ्रंट का काम कर रहा था। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, UK के 100 से ज्यादा एकेडमिक्स उन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे, जिन्हें सीधे तौर पर चीन सरकार फाइनेंस कर रही थी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी जैसे हाई-रिस्क वाले सेक्टर शामिल हैं।
कड़े कानून और बढ़ती निगरानी
यह सरकारी निर्देश 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' के तहत जारी किया गया है। अब यूनिवर्सिटीज और बिजनेस के लिए रिसर्च पार्टनर्स और फंडिंग सोर्सेज की स्क्रीनिंग करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो गया है। Russell Group, जिसमें UK की 24 प्रमुख रिसर्च-इंटेंसिव यूनिवर्सिटीज शामिल हैं, ने भी इन नए नियमों को स्वीकार कर लिया है।
ग्लोबल 'डी-रिस्किंग' का दौर
वेस्टर्न देशों में अब टेक्नोलॉजी 'डी-रिस्किंग' का चलन बढ़ गया है। इस नीति को Five Eyes इंटेलिजेंस अलायंस (US, UK, Canada, Australia, New Zealand) का पूरा समर्थन है। अब इन देशों का फोकस ओपन रिसर्च के बजाय घरेलू इनोवेशन की सुरक्षा पर है, जिसका सीधा असर भविष्य के R&D कोलैबोरेशन और फंडिंग पाइपलाइन्स पर पड़ना तय है।
