जून 2026 तक भारतीय नागरिकों को मिलने वाले UK परमानेंट सेटलमेंट ग्रांट्स में **51%** का जोरदार उछाल आया है और यह संख्या **35,384** तक पहुंच गई है। हालांकि, ऑटम 2026 से लागू होने वाले कड़े सरकारी सुधारों के चलते भविष्य में रेजिडेंसी पाना मुश्किल हो सकता है।
सरकारी डेटा के अनुसार, जून 2026 तक भारतीय नागरिक UK में 'इंडेफिनिट लीव टू रिमेन' (ILR) प्राप्त करने वाले सबसे बड़े समूह बन गए हैं। पिछले साल के मुकाबले इसमें 51% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से उन वर्क-रूट वीजा की परिपक्वता के कारण है, जो पिछले 5 वर्षों में जारी किए गए थे।
बड़े नीतिगत बदलाव की तैयारी
वर्तमान में स्थायी निवास (PR) के लिए 5 साल की निरंतर रेजिडेंसी की आवश्यकता होती है। लेकिन, UK सरकार अब 'अर्नड सेटलमेंट' (Earned Settlement) मॉडल लाने जा रही है, जो ऑटम 2026 से प्रभावी होगा। नए प्रस्तावों के तहत, यह अवधि बढ़कर 10 साल हो सकती है, जबकि कुछ श्रेणियों के लिए यह समय सीमा 15 से 20 साल तक भी बढ़ाई जा सकती है।
स्किल और एजुकेशन पर असर
यह अनिश्चितता उन भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम है जो UK में टैलेंट मोबिलिटी पर निर्भर हैं। यदि परमानेंट रेजिडेंसी पाने का समय बढ़ता है, तो भारतीय IT और प्रोफेशनल सर्विस कंपनियों के लिए टॉप टैलेंट को रिटेन करना चुनौतीपूर्ण होगा।
शिक्षा क्षेत्र में भी इसका असर दिखने लगा है। जून 2026 तक भारतीय छात्रों को मिलने वाले वीजा की संख्या घटकर 82,523 रह गई है। आश्रितों (dependents) के लिए कड़े नियमों और ग्रेजुएट रूट में बदलाव के कारण छात्रों का रुझान कम हुआ है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या सरकार पुराने आवेदकों के लिए कोई छूट (transition period) देती है या सभी को नए कठिन नियमों के दायरे में रखा जाएगा।
