ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Andy Burnham आज 12 अक्टूबर, 2026 को संसद को संबोधित करेंगे। वे यूरोपीय संघ (EU) के साथ नए और सहयोगी संबंधों का प्रस्ताव रखेंगे, ताकि Brexit के बाद पैदा हुई आर्थिक सुस्ती से बाहर निकला जा सके।
जुलाई 2026 में पदभार संभालने के बाद से ही Andy Burnham ने Brexit के बाद की स्थिति को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी बाधा बताया है। आज हाउस ऑफ कॉमन्स में उनका संबोधन एक बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है। सरकार का मुख्य लक्ष्य ट्रेड और रेगुलेटरी नियमों में आ रही रुकावटों को कम करना और ब्रिटिश कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाना है। यह पिछली सरकार की नीतियों से पूरी तरह अलग रुख है, जिसने लंबे समय तक 2016 के रेफरेंडम परिणामों को दोबारा छूने से परहेज किया था।
नवंबर समिट पर टिकी दुनिया की नजरें
सभी की निगाहें 20 नवंबर, 2026 को होने वाले UK-EU समिट पर टिकी हैं। यह बैठक Burnham की नई रणनीति की पहली बड़ी परीक्षा होगी। हालांकि, किसी भी नए समझौते की राह आसान नहीं है। सरकार को यूरोपीय नेतृत्व की शर्तों और घरेलू राजनीति के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना होगा।
बड़े राजनीतिक और आर्थिक जोखिम
आर्थिक सुधार की कोशिशों के बीच सरकार को गहरे राजनीतिक विरोध का भी डर है। विश्लेषकों का मानना है कि EU के साथ एकीकरण की किसी भी कोशिश से ब्रिटेन में वही पुराना राजनीतिक ध्रुवीकरण दोबारा पैदा हो सकता है। सबसे संवेदनशील मुद्दों में EU को बजट में योगदान, फ्रीडम ऑफ मूवमेंट और करेंसी अलाइनमेंट जैसे विषय शामिल हैं। इन मुद्दों पर जनता की कड़ी प्रतिक्रिया की संभावना बनी हुई है।
निवेशकों और बड़े बिजनेस घरानों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप पेश कर पाती है या नहीं।
