यूके सरकार इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव पर पुनर्विचार कर रही है। बढ़ते विरोध और सोशल केयर सेक्टर में स्टाफ की भारी कमी को देखते हुए, सेटलमेंट टाइमलाइन को **10 साल** तक बढ़ाने की योजना को वापस लिया जा सकता है।
ब्रिटेन की सरकार अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने के संकेत दे रही है। होम सेक्रेटरी शबाना महमूद के हालिया बयानों से साफ है कि सरकार उन विवादित सुधारों से पीछे हट सकती है, जिनके तहत विदेशी नागरिकों के लिए 'सेटलमेंट स्टेटस' पाने की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव था। यह कदम सरकार के भीतर और बाहर बढ़ रहे उस दबाव के बाद उठाया गया है, जिसमें एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी थी कि यह बदलाव यूके के लेबर मार्केट के लिए घातक साबित होगा।
सोशल केयर सेक्टर पर दबाव
इस पूरी बहस के केंद्र में यूके का एडल्ट सोशल केयर सेक्टर है। यह इंडस्ट्री लंबे समय से स्टाफ की जबरदस्त किल्लत से जूझ रही है। कई केयर प्रोवाइडर्स अपनी जरूरी सेवाओं को चलाने के लिए विदेशी कामगारों पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नियम लागू हो जाता, तो परमानेंट रेजिडेंसी का रास्ता 15 साल तक लंबा हो सकता था। इससे विदेशी स्टाफ के लिए यूके आना कम आकर्षक हो जाता, जिससे पहले से ही दबाव में चल रही इस इंडस्ट्री की कमर टूट जाती।
बिजनेस और निवेशकों के लिए खतरा
हेल्थकेयर और रिक्रूटमेंट से जुड़े निवेशकों के लिए यह इमिग्रेशन पॉलिसी एक बड़ी रिस्क है। वीजा नियमों में अस्थिरता का मतलब है रिक्रूटमेंट कॉस्ट में बढ़ोतरी और स्टाफ का हाई टर्नओवर। इसका सीधा असर प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है।
फिलहाल सरकार के दो बड़े विभागों—'होम ऑफिस' और 'डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ' के बीच भी खींचतान देखी जा रही है। जहां होम ऑफिस माइग्रेशन कम करने के अपने लक्ष्यों पर अड़ा है, वहीं हेल्थ डिपार्टमेंट केयर सिस्टम की स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, अक्टूबर से कुछ खास समुदायों जैसे अफगान महिलाओं और गाजा से आए फिलिस्तीनियों के लिए नए 'सेफ एंड लीगल रूट' शुरू किए जाएंगे, लेकिन सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार 10 साल की समयसीमा वाले उस पुराने प्रस्ताव को पूरी तरह रद्द करेगी या कोई बीच का रास्ता निकालेगी।
