ईरान के खिलाफ संभावित मिलिट्री एक्शन के संकेतों ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत की महंगाई और रुपये की चाल प्रभावित होने का डर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकने के लिए अमेरिका मिलिट्री एक्शन के विकल्प को खुला रख रहा है, साथ ही कूटनीतिक रास्ते भी खुले हैं। मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा खतरा बन गया है।\n\n### भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?\nभारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में कीमतों का उछाल सीधा भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है। तेल के दाम बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई और रुपये की वैल्यू गिरने का डर रहता है।\n\n### किन कंपनियों पर पड़ेगा असर?\nइस तनाव से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, और Hindustan Petroleum पर मार्जिन का दबाव आ सकता है। वहीं, अपस्ट्रीम कंपनियां जैसे ONGC और Oil India के लिए ग्लोबल प्राइस ट्रेंड्स अहम होंगे।\n\nइसके अलावा, 'स्ट्रेट ऑफ हर्मुज' जैसे समुद्री रास्तों में बाधा आने से फ्रेट कॉस्ट भी बढ़ सकती है। फिलहाल निवेशकों को Brent Crude के दाम और USD-INR एक्सचेंज रेट पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि एनर्जी मार्केट में कोई भी बड़ा उछाल सीधे तौर पर भारतीय मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा को बिगाड़ सकता है।
