UNGA के मंच से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ट्रेड टैरिफ को विदेशी नीति का बड़ा हथियार बनाने के संकेत दिए हैं। उनके इस बयान से ग्लोबल सप्लाई चेन और एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर में भविष्य में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है।
न्यूयॉर्क में आयोजित 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के भाषण ने ग्लोबल मार्केट के लिए नए संकेत दे दिए हैं। हालांकि उनके भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता वाले दावे पर खूब चर्चा हुई, लेकिन निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 'ट्रेड टैरिफ' (Trade Tariffs) को लेकर उनका सख्त रुख है।
एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए क्या हैं रिस्क?
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस द्वारा मिली विधायी शक्तियों का इस्तेमाल करके टैरिफ एनफोर्समेंट को अपनी अंतरराष्ट्रीय नीति का मुख्य स्तंभ बनाएंगे। भारतीय निवेशकों के लिए यह एक 'चेतावनी' की तरह है। भारत के उन सेक्टरों पर नजर रखने की जरूरत है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करते हैं, जैसे कि:
- IT सेक्टर
- फार्मास्यूटिकल्स
- इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल
अगर अमेरिका टैरिफ और कस्टम ड्यूटी बढ़ाता है, तो इन कंपनियों के मार्जिन और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है।
भारत का रुख साफ और स्थिर
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में व्यक्तिगत भूमिका निभाई, लेकिन नई दिल्ली ने इसे खारिज कर दिया है। भारत सरकार का रुख पहले की तरह ही स्पष्ट है कि नियंत्रण रेखा (LoC) पर कोई भी सीजफायर दोनों देशों के मिलिट्री अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था। भारत की नीति रही है कि द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं होगी। निवेशकों के लिए यह अच्छी बात है कि भारत अपनी कूटनीतिक स्थिरता बनाए हुए है।
मार्केट पर असर
ट्रंप की यह 'बाइनरी' और हाई-स्टेक्स वाली नीति ग्लोबल मार्केट में 'वोलेटिलिटी' (Volatility) बढ़ा सकती है। जैसे-जैसे ग्लोबल ट्रेड के नियम बदल रहे हैं, निवेशकों को यह समझना होगा कि अमेरिका का यह आक्रामक रवैया भविष्य में कस्टम कॉस्ट और इमर्जिंग मार्केट के प्रति सेंटीमेंट को कैसे प्रभावित करता है।
