3 नवंबर, 2026 को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। यदि डेमोक्रेट्स का कांग्रेस में दबदबा बनता है, तो ट्रंप ने 'वीटो' का इस्तेमाल करने का संकेत दिया है। यह पॉलिसी अनिश्चितता ग्लोबल मार्केट्स और भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए रिस्क बढ़ा सकती है।
चुनावी घमासान और 'Veto' की रणनीति
अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी आक्रामक रणनीति का खुलासा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कांग्रेस के किसी भी सदन (House या Senate) में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलता है, तो वह 'वीटो' (Veto) पावर का भरपूर उपयोग करेंगे। यह कदम आने वाली कांग्रेस की विधायी शक्तियों को सीमित करने और अपनी शर्तों पर बातचीत करने के लिए उठाया जा रहा है।
राजनीतिक गतिरोध (Gridlock) का असर
वाशिंगटन में इस तरह के राजनीतिक टकराव का सीधा असर नीतिगत फैसलों पर पड़ता है। जब सरकार के अलग-अलग अंगों में अलग पार्टियों का नियंत्रण होता है, तो नए कानून बनाने, बजट पास करने या आर्थिक सुधार लागू करने में भारी रुकावट आती है। ट्रेड, इमिग्रेशन और सरकारी खर्च जैसे मुद्दों पर फैसला लेने की प्रक्रिया ठप हो सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता की बात 'मार्केट वोलैटिलिटी' है। अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता का असर ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम पर पड़ता है। यदि वहां लंबे समय तक डेडलॉक रहता है, तो इसका असर US Dollar की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रिस्क-प्रूफाइल पर पड़ेगा। यह सीधे तौर पर भारत जैसे उभरते बाजारों में आने वाले कैपिटल फ्लो (Capital Flow) को प्रभावित कर सकता है।
अनिश्चितता का दौर
ट्रंप प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कांग्रेस सहयोग नहीं करती है, तो वे इमिग्रेशन और ट्रेड टैरिफ जैसे मुद्दों पर 'एग्जीक्यूटिव एक्शन' (Executive Actions) का रास्ता अपनाएंगे। हालांकि, यह नीति को तो चालू रख सकता है, लेकिन बाजार को 'अनप्रेडिक्टेबिलिटी' बिल्कुल पसंद नहीं है। कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों के कारण बाजार में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है। 3 नवंबर, 2026 के चुनाव नतीजे ही तय करेंगे कि वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन क्या होगा और आने वाले समय में अमेरिकी आर्थिक नीति किस दिशा में जाएगी।
