US प्रेसिडेंट Donald Trump ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर Lake Ontario का नाम बदलकर 'Lake America' कर दिया है। इस कदम के साथ ही अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वार और गहरा गया है, क्योंकि अमेरिका ने कनाडा के **$20 बिलियन** के सामान पर **50%** टैरिफ लगा दिया है।
नाम बदलने की राजनीति और ट्रेड वार
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने गुरुवार को एक ओवल ऑफिस इवेंट के दौरान इंटीरियर डिपार्टमेंट को Lake Ontario को सरकारी दस्तावेजों में 'Lake America' दर्ज करने का औपचारिक निर्देश दिया है। हालांकि, यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं या कनाडा की संप्रभुता पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं डालता, लेकिन यह दोनों देशों के बीच बिगड़ते कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों की ओर इशारा करता है। निवेशकों के लिए असली चिंता नाम में बदलाव नहीं, बल्कि इसके पीछे की आर्थिक तनातनी है।
50% टैरिफ की मार
यह नामकरण कनाडा के सामानों पर 50% टैरिफ (Tariff) लगाने के फैसले के बाद आया है। अमेरिका के इस आक्रामक रुख का कनाडा ने भी कड़ा विरोध किया है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इससे उन कंपनियों के लिए सप्लाई चेन का संकट खड़ा हो गया है जो दोनों देशों के बीच व्यापार करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ेगी और कमोडिटी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खतरा?
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने भौगोलिक नाम बदलने का इस्तेमाल राजनीतिक टूल की तरह किया है। इससे पहले Gulf of Mexico को 'Gulf of America' कहा गया था। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह 'America First' पॉलिसी का हिस्सा है, लेकिन इसका असर निवेशकों पर बुरा पड़ सकता है। अगर यह ट्रेड वार लंबा खिंचता है, तो नॉर्थ अमेरिकन मार्केट पर निर्भर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। International Hydrographic Organization के पास इस घरेलू फैसले को बदलने का कोई अधिकार नहीं है, इसलिए अब निवेशकों को सरकारी नोटिफिकेशन और नई ट्रेड पॉलिसी पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
