पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Iran के साथ किसी भी तरह की प्रतिबंध राहत डील से इनकार कर दिया है। इस कूटनीतिक अनिश्चितता का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पड़ता है, जो ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और भारतीय बाजार की स्थिरता के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है।
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे गतिरोध में एक नया मोड़ आया है। Donald Trump ने सोशल मीडिया के जरिए उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उनका प्रशासन परमाणु समझौते के बदले Iran को आर्थिक राहत या फ्रीज की गई संपत्ति जारी करने की पेशकश कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल नतीजा सिफर है।\n\n### मुख्य विवाद क्या है?\n\nईरान की मांग है कि उसे अपने ऑयल एक्सपोर्ट को फिर से शुरू करने की अनुमति मिले और उसकी अटकी हुई फंड राशि जारी की जाए। इसके विपरीत, अमेरिका का कहना है कि किसी भी तरह की आर्थिक ढील से पहले ईरान को अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर सख्त और वेरिफिएबल सीमाएं लगानी होंगी। अमेरिका लगातार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है।\n\n### एनर्जी मार्केट पर असर\n\nनिवेशकों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह ग्लोबल क्रूड ऑयल ट्रांजिट का सबसे अहम 'चोक पॉइंट' है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री यातायात बाधित होता है, तो क्रूड ऑयल के ग्लोबल बेंचमार्क में वोलेटिलिटी (Volatility) आना तय है।\n\n### भारतीय निवेशकों के लिए मायने\n\nभारत दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में से एक है। क्रूड की बढ़ती कीमतें देश के ट्रेड डेफिसिट और महंगाई पर बुरा असर डाल सकती हैं। भारतीय मार्केट में इसका सीधा असर सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर दिखता है। यदि तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं, तो इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, क्रूड के आयात बिल में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय रुपये (Rupee) की कमजोरी के रूप में भी सामने आ सकता है। फिलहाल निवेशकों को इस कूटनीतिक हलचल और समुद्री यातायात पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
