ट्रंप प्रशासन ने International Criminal Court (ICC) के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार की है। इसके जरिए कोर्ट की अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम तक पहुंच को पूरी तरह ब्लॉक किया जाएगा, ताकि इजरायली अधिकारियों के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट वापस लिए जा सकें।
वित्तीय घेराबंदी की रणनीति
ट्रंप प्रशासन अब सीधे तौर पर द हेग स्थित International Criminal Court (ICC) को निशाना बना रहा है। इस प्रस्तावित रणनीति के तहत कोर्ट को अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम से पूरी तरह से अलग-थलग किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि संस्था न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन-देन कर पाएगी और न ही अपने वेंडर्स को भुगतान कर सकेगी।
डॉलर सिस्टम की पकड़
इस कदम की सफलता के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक दबदबा है। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय सेटलमेंट अमेरिकी डॉलर-क्लियरिंग सिस्टम के माध्यम से होते हैं। यदि ICC पर प्रतिबंध लगते हैं, तो दुनिया भर के बैंक किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए कोर्ट के साथ अपनी सेवाएं बंद कर देंगे, जिससे इसका दैनिक कामकाज पूरी तरह से बाधित हो सकता है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कड़े कदम के पीछे मुख्य वजह नवंबर 2024 में ICC द्वारा इजरायली अधिकारियों, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं, के खिलाफ जारी किए गए अरेस्ट वारंट हैं। अमेरिका और इजरायल दोनों का तर्क है कि 'Rome Statute' के हस्ताक्षरकर्ता न होने के कारण ICC का उन पर कोई कानूनी अधिकार क्षेत्र नहीं है।
ग्लोबल मार्केट और कूटनीति पर असर
निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद अहम है क्योंकि यह भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर ट्रेड रिलेशंस और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। आगामी United Nations General Assembly में इस मुद्दे पर बड़ा राजनयिक ड्रामा देखने को मिल सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
