US Supreme Court: ट्रंप प्रशासन ने डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज करने की लगाई गुहार

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Supreme Court: ट्रंप प्रशासन ने डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज करने की लगाई गुहार

ट्रंप प्रशासन ने US Supreme Court से गुहार लगाई है कि वह प्रवासियों को तीसरे देशों में भेजने की प्रक्रिया में आ रही कानूनी बाधाओं को दूर करे। सरकार लोअर कोर्ट के उन आदेशों को दरकिनार करना चाहती है, जो डिपोर्टेशन से पहले सुरक्षा मूल्यांकन अनिवार्य करते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर US Supreme Court से तीसरे देशों में प्रवासियों को भेजने से जुड़े कानूनी विवाद में हस्तक्षेप करने को कहा है। वर्तमान में, संघीय अदालतों के आदेशों के तहत अधिकारियों को प्रवासियों को यह तर्क देने का मौका देना पड़ता है कि उन्हें उन देशों में प्रताड़ित किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि इन कानूनी अनिवार्यताओं के कारण लगभग 24 देशों—जिनमें पनामा, इक्वेटोरियल गिनी और दक्षिण सूडान शामिल हैं—के साथ हुए डिपोर्टेशन समझौते ठप पड़े हैं।

सरकारी तर्क बनाम सुरक्षा दावे

डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का कहना है कि इन कानूनी अड़चनों की वजह से डिपोर्टेशन फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ रहा है। हाल ही में एक ऐसी फ्लाइट भी रोकी गई थी, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग सवार थे। सरकार का दावा है कि ये पार्टनर देश पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा देते हैं, इसलिए अदालती समीक्षा की अतिरिक्त प्रक्रिया अनावश्यक और सरकारी संसाधनों पर बोझ है।

मानवाधिकारों पर सवाल

दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने डिपोर्ट किए गए लोगों के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार और खराब डिटेंशन स्थितियों के दावे किए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि सरकार की 'तेज और प्रभावी' सीमा सुरक्षा नीति को प्राथमिकता दी जाए या उन संवैधानिक सुरक्षा मानकों को जो किसी व्यक्ति को गंभीर खतरे में पड़ने से बचाने के लिए बनाए गए हैं। यह फैसला भविष्य में अमेरिका की आव्रजन नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौतों पर गहरा असर डालेगा।

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