तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के खिलाफ आक्रामक होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। यह जियोपॉलिटिकल हलचल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों के लिए बड़ा रिस्क है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
तेहरान के मशहूर Enghelab Square में लगाए गए होर्डिंग्स में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को जेल की सलाखों के पीछे दिखाया गया है। यह कदम ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बढ़ती कड़वाहट को साफ दर्शाता है। यह तनाव उस वक्त और गहरा गया है जब अमेरिका ने इजरायल को दी जाने वाली $4 अरब की सालाना मिलिट्री एड (Military Aid) को 2026 के अंत तक खत्म करने का फैसला किया है।
भारत और एनर्जी मार्केट पर असर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क Strait of Hormuz से जुड़ी सप्लाई चेन है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है। किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नाकेबंदी ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में भारी उतार-चढ़ाव ला सकती है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल इम्पोर्टर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। Brent Crude की कीमतों में उछाल से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सेक्टर के इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएंगे। महंगाई बढ़ने से RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर दबाव आ सकता है, जो बाजार की लिक्विडिटी और कंपनियों की बॉरोइंग कॉस्ट (Borrowing Cost) को प्रभावित करेगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बाजार के लिए यह देखना जरूरी है कि यह सिर्फ जुबानी जंग है या मामला सीधा मिलिट्री टकराव की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों को ऑयल प्राइस ट्रेंड्स, शिपिंग इंश्योरेंस रेट्स और प्रमुख एनर्जी उत्पादक देशों के बयानों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सप्लाय चेन रिस्क के मुख्य इंडिकेटर्स हैं।
