UN Security Council में एशिया-पैसिफिक सीट के लिए अब भारत के सामने ताजिकिस्तान खड़ा हो गया है। साल 2028-2029 के टर्म के लिए यह मुकाबला जून 2027 में होने वाले चुनाव के जरिए तय होगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की एशिया-पैसिफिक रीजन की अस्थायी सीट के लिए ताजिकिस्तान ने आधिकारिक दावेदारी पेश कर दी है। 15 सदस्यीय इस काउंसिल में सदस्यता के लिए ताजिकिस्तान पहली बार दौड़ में शामिल हुआ है, जिससे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। इस सीट के लिए वोटिंग जून 2027 में होनी है।
भारत का 'SHANTI' दांव
भारत अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए 'SHANTI' (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) फ्रेमवर्क के साथ आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत का फोकस पीसकीपिंग ऑपरेशंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमन, समुद्री सुरक्षा और ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक मंच पर बुलंद करने पर है। भारत पहले ही 8 बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है, जिसका आखिरी कार्यकाल 2022 में समाप्त हुआ था।
ताजिकिस्तान की रणनीति
ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन ने इस दावेदारी को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर अपनी अलग राय रखने का एक जरिया बताया है। ताजिकिस्तान का तर्क है कि सीमा संबंधी जटिलताओं और शांति स्थापना में उनके अनुभव को वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
कूटनीतिक मायने
हालांकि दोनों देशों के बीच पेशेवर रिश्ते बरकरार हैं, लेकिन 2027 का यह चुनाव एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती भू-राजनीति का बड़ा संकेत है। UN जनरल असेंबली के सदस्यों के बीच भारत का पुराना नेटवर्क और प्रभाव एक तरफ है, तो वहीं ताजिकिस्तान के लिए यह अपनी पहली बड़ी वैश्विक जीत दर्ज करने का मौका है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि आगामी महीनों में दोनों देश अपना एजेंडा वैश्विक मंच पर किस तरह पेश करते हैं।
