स्वीडन के प्रधानमंत्री Ulf Kristersson ने अपनी कंजरवेटिव सरकार के चुनाव हारने के बाद इस्तीफा दे दिया है। अब Magdalena Andersson के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है, हालांकि गठबंधन को लेकर चुनौतियां बरकरार हैं।
स्वीडन के प्रधानमंत्री Ulf Kristersson ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब उनकी कंजरवेटिव गठबंधन सरकार नेशनल इलेक्शन में बहुमत साबित करने में विफल रही। चुनाव के नतीजों में विपक्षी वामपंथी गठबंधन ने 349 सीटों वाली संसद यानी 'Riksdag' में 176 सीटें हासिल कीं, जबकि मौजूदा सरकार 173 सीटों पर ही सिमट कर रह गई।\n\n### सरकार गठन में पेच\n\nसोशल डेमोक्रेट्स की नेता Magdalena Andersson अब नई सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी हैं। हालांकि, उनके लिए यह राह आसान नहीं है। गठबंधन के भीतर वैचारिक मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती 'सेंटर पार्टी' का रुख है, जिसने 'लेफ्ट पार्टी' के साथ किसी भी तरह के सहयोग से इनकार कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन अंदरूनी कलह के कारण कैबिनेट के गठन में देरी हो सकती है, जिससे घरेलू पॉलिसी और बजट से जुड़े फैसलों में अनिश्चितता बनी रहेगी।\n\n### विदेश नीति पर क्या है असर?\n\nसरकार बदलने के बावजूद स्वीडन की विदेश नीति में बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। यूक्रेन को समर्थन देने और NATO के 32वें सदस्य के रूप में भूमिका निभाने पर सभी राजनीतिक दलों में आम सहमति बनी हुई है। निवेशकों के लिए यह विदेशी मोर्चे पर एक 'स्थिर आधार' की तरह है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या नई सरकार आर्थिक सुधारों और विधायी एजेंडे पर आम सहमति बना पाएगी या संसद में गतिरोध की स्थिति बनी रहेगी।
