भारत-ईरान बातचीत के बीच बड़ा खतरा
प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान के बीच क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा के बावजूद, Strait of Hormuz में बढ़ता संघर्ष मुख्य चिंता का विषय बना हुआ है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर लगातार हो रहे हमलों और धमकियों के कारण वैश्विक ऊर्जा परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
शिपिंग ठप्प, तेल की कीमतों में भारी उछाल
दुनिया की 20% दैनिक तेल सप्लाई और बड़ी मात्रा में LNG शिपमेंट के लिए अहम Strait of Hormuz में फरवरी 2026 के अंत से ही शत्रुतापूर्ण घटनाओं के बाद से लगभग पूर्ण बंदी देखी जा रही है। शिपिंग कंपनियाँ बड़ी संख्या में अपनी सेवाएँ रोक चुकी हैं, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और $126 के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। जानकारों का मानना है कि अगर यह व्यवधान जारी रहा तो कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ेगी।
वैश्विक सप्लाई चेन पर गहरा असर
यह संकट सिर्फ ऊर्जा बाज़ार तक सीमित नहीं है। इसे 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा वैश्विक सप्लाई शॉक बताया जा रहा है, जो एक 'वैश्विक आर्थिक अंधकार युग' की चेतावनी दे रहा है। सप्लाई चेन में भारी देरी हो रही है, जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है और बीमा लागतें बढ़ गई हैं। कतर एनर्जी (QatarEnergy) जैसी कंपनियों को 'फोर्स मेजर' घोषित करना पड़ा है। इस बीच, जहाजों की सुरक्षा बढ़ाए जाने के प्रयास तेज़ हो गए हैं।
भारत की बढ़ती चिंता और कूटनीति
भारत, जो अपने 88% से अधिक तेल का आयात करता है, इन घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित है। भले ही भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन उसके LPG आयात का 85-90% हिस्सा अभी भी Strait of Hormuz पर निर्भर है। सरकार इस जटिल स्थिति को संभालने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रही है।
बाज़ार की प्रतिक्रिया और भविष्य का नज़रिया
हालांकि ईरान पहले भी Strait of Hormuz को बंद करने की धमकी दे चुका है, मौजूदा स्थिति एक बड़ा संकट है और इसने वैश्विक तेल बाज़ार में सबसे बड़ा सप्लाई व्यवधान पैदा किया है। मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता साफ़ दिख रही है। यह संघर्ष ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी कमज़ोरियां उजागर कर रहा है। अगर यह टकराव लंबा खिंचा तो क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में लंबे समय तक व्यवधान बना रहेगा, जिससे आर्थिक चुनौतियाँ और बढ़ेंगी।
