श्रीलंका ने अपने तट के पास फंसे **19** ईरानी ऑयल टैंकरों को मदद देने से साफ मना कर दिया है। कोलंबो को डर है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों (Sanctions) का उल्लंघन उसके नाजुक आर्थिक सुधार के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
श्रीलंका ने अपने दक्षिणी तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में लंगर डाले हुए 19 ईरानी तेल टैंकरों को आपातकालीन सहायता देने से आधिकारिक तौर पर मना कर दिया है। महीनों से फंसे इन जहाजों पर भोजन, पानी और ईंधन की भारी किल्लत है। मानवीय आधार पर मदद की गुहारों के बावजूद, कोलंबो सरकार का रुख साफ है कि उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों द्वारा दंड से बचना है।\n\nयह पूरा विवाद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से जुड़ा है। जुलाई 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ये जहाज फंस गए थे, जो अपनी वापसी नहीं कर पा रहे हैं। चूंकि ये जहाज ईरान के 'सेंक्शन लिस्ट' वाले मर्चेंट फ्लीट का हिस्सा हैं, इसलिए किसी भी तीसरे पक्ष द्वारा इन्हें ईंधन या रसद मुहैया कराना अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन माना जा सकता है।\n\nश्रीलंका के लिए दांव पर उसकी आर्थिक रिकवरी लगी है। देश अभी एक गहरे आर्थिक संकट से उबर रहा है और उसे अमेरिका समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग मिल रहा है। कोलंबो को 'सेकेंडरी सैंक्शंस' (Secondary Sanctions) का डर सता रहा है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों पर जुर्माना लगा सकता है जो प्रतिबंधित पक्षों के साथ लेनदेन करते हैं।\n\nफिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव के बीच यह स्थिति एक जटिल कानूनी और कूटनीतिक पहेली बन गई है। निजी आपूर्तिकर्ताओं ने भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली से कटने के डर से इन जहाजों से दूरी बना ली है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस नौसैनिक नाकेबंदी में कोई बदलाव आता है या यह समुद्री गतिरोध आगे और गहराता है।
