Sri Lanka में प्रस्तावित 22वें संशोधन की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट **1 सितंबर, 2026** से सुनवाई शुरू करेगा। इस बिल का लक्ष्य अदालती जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाना है ताकि **11 लाख** लंबित मामलों के बोझ को कम किया जा सके।
Sri Lanka की सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर, 2026 से प्रस्तावित 22वें संशोधन की संवैधानिक वैधता की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस बिल के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 65 से बढ़ाकर 67 साल और कोर्ट ऑफ अपील के जजों की उम्र 63 से 65 साल करने का प्रस्ताव है। चीफ जस्टिस प्रीथी पदमन सुरासेना ने इस मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की बेंच का गठन किया है।
सरकार का तर्क और विवाद
सरकार इसे प्रशासनिक सुधार बता रही है। उनका दावा है कि अनुभवी जजों का कार्यकाल बढ़ने से 11 लाख से अधिक लंबित केसों को निपटाने में मदद मिलेगी। हालांकि, Bar Association of Sri Lanka सहित कई कानूनी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया है।
न्यायिक स्वतंत्रता का मुद्दा
आलोचकों का तर्क है कि बिना व्यापक सहमति के कार्यकाल बढ़ाने से न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और कार्यपालिका का हस्तक्षेप बढ़ सकता है। अब सभी की नजरें कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह बिल आगे बढ़ेगा या इसे संवैधानिक बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
