श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सऊदी अरब में मौत की सजा का सामना कर रहे अपने नागरिक अनोजान शिवरासा की जान बचाने के लिए शाही माफी (Royal Clemency) मांगने का वादा किया है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सऊदी अरब में हिरासत में लिए गए श्रीलंकाई नागरिक अनोजान शिवरासा की रिहाई के लिए औपचारिक रूप से शाही माफी की प्रक्रिया शुरू करने का संकल्प लिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब ऐसी खबरें सामने आई हैं कि इस मामले में सजा को जेल से बढ़ाकर अब 'कैपिटल पनिशमेंट' यानी मौत की सजा में बदल दिया गया है। परिजनों से सीधी मुलाकात के बाद राष्ट्रपति ने इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर बेहद गंभीरता से लिया है।
कानूनी स्थिति पर उलझन
वर्तमान में मामले की स्थिति को लेकर थोड़ी अस्पष्टता है। जहां परिवार का दावा है कि मामला अब मौत की सजा तक पहुंच गया है, वहीं श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे सऊदी न्यायिक अधिकारियों से औपचारिक लिखित पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स में 30 लाख सऊदी रियाल के जुर्माने और जेल की सजा का उल्लेख था। यह मामला खाड़ी देशों में स्थानीय कानूनों की जटिलता और ब्लैस्फेमी (ईशनिंदा) जैसे गंभीर आरोपों के गंभीर नतीजों को दर्शाता है।
राजनीतिक हलचल और प्रवासियों की सुरक्षा
यह मामला श्रीलंका में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष के नेता सजीथ प्रेमदासा ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। इस घटना ने विदेशों में काम कर रहे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर फिर से बहस छेड़ दी है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला रेमिटेंस श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत जैसी क्षेत्रीय शक्तियों के कूटनीतिक हस्तक्षेप से भी मदद मिल सकती है, हालांकि फिलहाल किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल रियाद स्थित श्रीलंकाई दूतावास सऊदी अधिकारियों के साथ संपर्क में है। अब सबकी नजरें सऊदी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं, जो इस दया याचिका पर अंतिम निर्णय लेंगे।
