गॉल के तट पर महीनों से फंसे ईरान के **40** नाविकों को श्रीलंका ने मेडिकल सहायता देकर वापस उनके देश भेज दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ये जहाज लंबे समय से समंदर में लंगर डाले हुए हैं, जिससे श्रीलंका के सामने एक बड़ी राजनयिक चुनौती पैदा हो गई है।
श्रीलंका के अधिकारियों ने गॉल तट पर खड़े कमर्शियल टैंकरों में फंसे ईरान के 40 नाविकों को मेडिकल मदद मुहैया कराते हुए उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है। इन नाविकों को वीकेंड पर किनारे लाया गया और फिर तेहरान रवाना कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय शिपिंग एजेंट्स और ईरानी दूतावास के बीच तालमेल से पूरी की गई।
क्यों फंसे हैं ये जहाज?
इन टैंकरों के फंसे होने की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी है। अपने होम पोर्ट पर वापस न लौट पाने के कारण, करीब 20 जहाज श्रीलंका के तट से 24 समुद्री मील की दूरी पर लंगर डाले हुए हैं। महीनों से फंसे होने की वजह से इन जहाजों पर राशन, पानी और ईंधन की भारी किल्लत हो गई थी।
श्रीलंका की कठिन कूटनीतिक चाल
श्रीलंका के लिए यह स्थिति आर्थिक और राजनयिक संतुलन बनाने की परीक्षा है। देश इस समय IMF के साथ आर्थिक रिकवरी के लिए गंभीर बातचीत कर रहा है और अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाए रखना उसके लिए बेहद जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के साथ भी देश के रणनीतिक संबंध बने हुए हैं।
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कहीं इन अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के पालन के दौरान श्रीलंका पर अमेरिका के 'सेकेंडरी सैंक्शंस' का खतरा न मंडराए। हालांकि मानवीय आधार पर मदद करके सरकार ने एक संतुलित रुख अपनाया है, लेकिन विदेशी नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी से लॉजिस्टिकल और कूटनीतिक चुनौतियां बनी रहेंगी। मार्केट के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि हिंद महासागर में व्यापारिक मार्गों पर यह तनाव श्रीलंका की आर्थिक स्थिरता को कैसे प्रभावित करता है।
