श्रीलंका के समुद्री तट पर करीब 20 ईरानी ऑयल टैंकर फंसे हुए हैं, जिससे अमेरिका द्वारा सेकेंडरी सैंक्शंस (Secondary Sanctions) का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि श्रीलंका सरकार का कहना है कि ये जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हैं, लेकिन वाशिंगटन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्थानीय कंपनी इन्हें ईंधन या पानी जैसी सेवाएं देती है, तो उसे अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर किया जा सकता है।
श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगभग 20 खाली ईरानी ऑयल टैंकरों की मौजूदगी ने एक जटिल कूटनीतिक और आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। ये जहाज भोजन और पानी जैसी जरूरी चीजों की कमी से जूझ रहे हैं और अब ये अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी के केंद्र में आ गए हैं, जो प्रतिबंधों से बचने के प्रयासों (Sanctions Evasion) पर नजर रख रहे हैं।
सेकेंडरी सैंक्शंस का खतरा
अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी गैर-अमेरिकी कंपनियां प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले पक्षों के साथ बड़े लेनदेन में शामिल होंगी, उन पर सेकेंडरी सैंक्शंस लगाए जाएंगे। क्षेत्रीय कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा रिस्क अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम से पूरी तरह कट जाने का है। इसका सीधा मतलब यह है कि ये कंपनियां न तो डॉलर में ट्रांजेक्शन कर पाएंगी और न ही अंतरराष्ट्रीय बैंकों से क्रेडिट हासिल कर सकेंगी।
श्रीलंका सरकार की सफाई
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अमेरिकी प्रवर्तन कार्रवाई एक वैश्विक नीति का हिस्सा है, न कि कोलंबो को निशाना बनाने वाली कोई विशेष मुहिम। सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री दायित्वों का पालन भी करें और साथ ही स्थानीय व्यवसायों को वैश्विक व्यापार नियमों के अनपेक्षित उल्लंघन से भी बचा सकें।
ट्रेनिंग और निगरानी
स्थिति को देखते हुए, अमेरिका सक्रिय रूप से अनुपालन सुनिश्चित करने में जुटा है। सितंबर 2026 में, कोलंबो स्थित अमेरिकी दूतावास ने 40 से अधिक श्रीलंकाई अधिकारियों को ट्रेनिंग दी थी। इसका मकसद स्थानीय प्रशासन को उन धोखेबाज समुद्री प्रथाओं की पहचान करने के कौशल से लैस करना था, जिनके जरिए जहाजों की लोकेशन या कार्गो की उत्पत्ति छिपाई जाती है।
निवेशकों और मैरीटाइम सेक्टर की कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अलर्ट है। किसी भी स्थानीय फर्म द्वारा टैंकरों को रिफ्यूलिंग या पानी जैसी मामूली सेवाएं देना भी भारी जुर्माने का कारण बन सकता है। आने वाले हफ्तों में अमेरिका का दबाव और इन जहाजों की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि ये फैक्टर्स शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के ऑपरेशनल रिस्क को सीधा प्रभावित करेंगे।
