कोलंबो की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में सांसद Namal Rajapaksa की रिमांड को **16 अक्टूबर** तक बढ़ा दिया है। यह कानूनी कार्रवाई श्रीलंका में हो रहे बड़े राजनीतिक बदलावों और गवर्नेंस में आ रहे उतार-चढ़ाव को दर्शाती है, जिस पर क्षेत्र के जानकारों की पैनी नजर है।
मामले की पृष्ठभूमि
कोलंबो की चीफ मजिस्ट्रेट अदालत ने सांसद Namal Rajapaksa और Krrish Group की पूर्व एग्जीक्यूटिव Janaki Siriwardena को 16 अक्टूबर, 2026 तक हिरासत में रखने का आदेश दिया है। यह फैसला एक पुराने होटल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े 7 करोड़ श्रीलंकाई रुपये के भुगतान की जांच के दौरान लिया गया है, जिसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।
आरोपों का पेंच
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पिछला प्रशासन इस प्रोजेक्ट को तेजी से मंजूरी देने के बदले यह रकम बतौर रिश्वत ले रहा था। वहीं, बचाव पक्ष का कहना है कि यह राशि रिश्वत नहीं, बल्कि 2014 में कोलंबो में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय रग्बी टूर्नामेंट के लिए स्पॉन्सरशिप का पैसा था। अदालत ने फिलहाल उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है, जिससे साफ है कि कानूनी लड़ाई अभी और खिंचेगी।
बदलता राजनीतिक माहौल
यह मामला मौजूदा 'नेशनल पीपल्स पावर' सरकार के उस बड़े भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत वे पुराने सरकारी प्रोजेक्ट्स की जांच कर रहे हैं। विपक्ष की पार्टी 'Sri Lanka Podujana Peramuna' इसे राजनीतिक साजिश मान रही है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है।
निवेशकों के लिए श्रीलंका का यह राजनीतिक परिदृश्य काफी महत्वपूर्ण है। किसी भी देश में व्यापार करने की आसानी (Ease of Doing Business) और वहां की आर्थिक स्थिरता काफी हद तक राजनीतिक माहौल पर निर्भर करती है। अब 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें हैं, क्योंकि उस दिन जमानत पर फैसला लिया जा सकता है, जो देश की भावी राजनीतिक दिशा तय करने में एक अहम मोड़ साबित होगा।
