श्रीलंका की हाई कोर्ट ने 2019 के ईस्टर संडे आत्मघाती हमलों के मामले में 15 लोगों को दोषी ठहराया है। इस हमले में 270 लोगों की जान गई थी, जिनमें 11 भारतीय भी शामिल थे। इस फैसले के साथ ही पांच साल लंबी कानूनी प्रक्रिया का समापन हुआ है।
अप्रैल 2019 में हुए इस खौफनाक हमले के मामले में श्रीलंका की हाई कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने देश भर के चर्चों और होटलों को निशाना बनाने वाले 15 संदिग्धों को दोषी करार दिया है, जबकि 9 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। यह लंबी कानूनी लड़ाई पूरे 5 साल तक चली।
हमले की भयावहता और मास्टरमाइंड
यह हमला श्रीलंका के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है, जिसमें 270 लोगों की मौत हुई थी और 500 से अधिक घायल हुए थे। इसमें 11 भारतीय नागरिकों की भी दुखद मृत्यु हुई थी। अभियोजन पक्ष ने कुल 23,000 से अधिक आरोप दायर किए थे। कोर्ट ने Naufar Moulavi को इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य मास्टरमाइंड माना है, जो National Thawheed Jamaat से जुड़ा था, जिसने ISIS के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी।
आर्थिक और निवेश पर असर
निवेशकों के लिहाज से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। 2019 के इन बम धमाकों ने श्रीलंका के टूरिज्म सेक्टर को तबाह कर दिया था, जो देश की फॉरेन एक्सचेंज कमाई का मुख्य जरिया है। सरकार अब पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है, और सुरक्षा संबंधी इस मामले में कानूनी अंतिम निर्णय को रीजनल स्टेबिलिटी और निवेशकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस मामले में 2,300 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। हालांकि, इस मामले ने सुरक्षा और खुफिया तंत्र की विफलताओं पर कई सवाल भी खड़े किए थे, जिसकी चर्चा आज भी वहां के राजनीतिक माहौल में बनी हुई है। श्रीलंका की रिकवरी के लिए अब आंतरिक सामाजिक स्थिरता सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
